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Nagaur Patrika…रेडीमेड गारमेंड्स के बाजार में खुद को बदलने वाले टेलर मास्टरों ने जमाई धाक…VIDEO

नागौर. बदले हुए दौर में परंपरागत रूप से कपड़े की सिलाई करने वाले दर्जियों की संख्या न केवल कम हुई है, बल्कि उनका कारोबार भी पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। कारण रेडीमेड गारमेंड्स का बढ़ता चलन रहा है। ऐसे में दर्जियों ने जिसने अपने नए जमाने यानि की फैशन के हिसाब से जिसने बदल […]

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नागौर. बदले हुए दौर में परंपरागत रूप से कपड़े की सिलाई करने वाले दर्जियों की संख्या न केवल कम हुई है, बल्कि उनका कारोबार भी पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। कारण रेडीमेड गारमेंड्स का बढ़ता चलन रहा है। ऐसे में दर्जियों ने जिसने अपने नए जमाने यानि की फैशन के हिसाब से जिसने बदल लिया। वह आज भी इस क्षेत्र में बेहतर कारोबार कर रहे हैं। आज भी ऐसे दर्जियों के यहां विश्ेाष पर्वों के दौरान लंबी बुकिंग रहती है। समय के साथ नहीं चलने वाले बाजार से गायब हो गए हैं। इस संबंध में परंपरागत के साथ ही आधुनिक परिधानों की सिलाई करने वाले दर्जियों से से बातचीत हुई तो उनका कहना था कि रेडीमेड गारमेंड्स में विभिन्न प्रकार की डिजाइन तो रहती है, लेकिन बिलकुल फिल्मी तर्ज पर या नए फैशन के हिसाब से कपड़े जिसे पहनने हैं तो उसे सिलाने के लिए आना ही पड़ेगा। क्योंकि रेडीमेड गारमेंड्स से बेहतर सिलाई के साथ मनमाफिक डिजाइन तो एक दर्जी ही दे सकता है।
सामान्य पैंट शर्ट से लेकर इंडो वेस्टर्न अचकन
कपड़े की सिलाई करने वाले दर्जी बताते हैं कि अब जींस पैँट एवं शर्ट का चलन घटा है। अब लोग सामान्य पैंट-शर्ट सिलाने को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। आजकल अब कपड़े खरीदने के लिए भी बाजार जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। सभी कुछ बेहतर गुणवत्ता के कपड़े सहित पूरी सिलाई दर्जी यानि की टेलर मास्टर के यहां ही हो जाती है। इसके साथ ही लोग फैशन एवं कपड़े की गुणवत्ता को लेकर सजग हुए हैं। वर्तमान में पैंट शर्ट, कोट-पैंट शर्ट, नेहरू जैकेट एवं इंडो वेस्टर्न अचकन का चलन बढ़ा है। लोगों से हटकर नजर आने की इच्छा के चलते युवाओं में इसका क्रेज पिछले कुछ सालों से बढ़ा है। यही वजह है कि ज्यादातर शादियों में कुर्ता, पैजामा एवं अचमन पहने ही ज्यादातर दूल्हे नजर आते हैं।
बेहतर गुणवत्ता के साथ फैशन भी
दर्जियों का मानना है कि टू पीस, थ्रीपीस, बंद गले का जोधपुरी शूट का चलन भी तेजी से बढ़ा है। हालांकि रेडीमेड गारमेंड्स के बाजार में जाने पर सामान्य रूप से पैंट शर्ट भी करीब दो हजार की सामान्य कीमत होती है, और कपड़े सहित इनकी पूरी सिलाई नए फैशन के साथ दर्जी भी लगभग इससे कम कीमत में पूरा कपड़ा सिलकर दे देते हैं। इसके बाद फिर विशेष शूट की मांग होने पर बिलकुल फिल्मी स्टाइल में एक से बढकऱ एक शूट बाजार से काफी कम कीमत में सिले जा रहे हैं। यही वजह है कि शहर में प्रमुख रूप से कपड़े की सिलाई करने वाले टेलर मास्टरों के पास दीपावली ही नहीं, बल्कि इसके बाद की तिथियों तक सिलाई करने के लिए बुकिंग अभी से ही की जा चुकी है।
50 साल से ज्यादा पुरानी दुकान
वर्तमान में समय में आधुनिक दौर के साथ खुद को बदलने को वाले ही बाजार में रह पाए हैं। मेरी खुद की दुकान 50 साल से ज्यादा पुरानी है। मेरे दादा ने यहां पर दुकान खोली, फिर मेरे पिता ने इस व्यवसाय को आगे बढ़ाया। अब मैं यह काम कर रहा हूं। अपना यह हुनर अपने पुत्र अमन को भी दे रहा हूं। दुकान पर सामान्य पैंट शर्ट से लेकर आधुनिक फैशन तक के परिधान सिले जाते हैं। कपड़े की गुणवत्ता एवं सिलाई के मामले में बाजार में इसका कोई मुकाबला नहीं रहता है। यही वजह है कि दुकान पर पूरे साल कारीगर काम में बिजी रहते हैं।
तबरेज खान, टेलर, गांधी चौक
एक से बढकऱ एक डिजाइन के शूट
दुकान पर सामान्य पैंट शर्ट से लेकर एक से एक बढकऱ अत्याधुनिक डिजाइन में शूट सिले जाते हैं। अब जिन्होंने समय के साथ खुद को बदल लिया, वह आज भी इस क्षेत्र में बेहतर कारोबार कर रहे हैं। मेरी शॉप में सिलाई के साथ ही कपड़े तक मिल जाते हैं। डिजाइन और सज्जा तो सिलाई कराने वाला जिस प्रकार चाहता है, कर दिया जाता है। रेडीमेड गारमेंड्स में यह न तो मनमाफिक डिजाइन मिलती है, और न ही गुणवत्ता। यह दोनो चाहिए तो फिर सिलाने के लिए आना ही पड़ेगा।
अशोक टाक, दिल्ली दरवाजा