12 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नागौर

Nagaur patrika…318वीं जय जन्म जयंती पर अ_म तप, रजत कलश की लगी बोली, श्रद्धा का उमड़ा संगम…VIDEO

नागौर. जैन समाज के महान संत आचार्य जयमल जी महाराज की 318वीं जयंती के अवसर पर अम तप, प्रवचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियो के साथ विविध धार्मिक कार्यक्रम हुए। इस मौके पर हुए प्रवचन में जैन समणी सुयशनिधि ने कहा कि जब समाज में अन्याय और अधर्म बढ़ता है तो ऐसे ही तपस्वी महापुरुष जन्म लेकर समाज […]

Google source verification

नागौर. जैन समाज के महान संत आचार्य जयमल जी महाराज की 318वीं जयंती के अवसर पर अम तप, प्रवचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियो के साथ विविध धार्मिक कार्यक्रम हुए। इस मौके पर हुए प्रवचन में जैन समणी सुयशनिधि ने कहा कि जब समाज में अन्याय और अधर्म बढ़ता है तो ऐसे ही तपस्वी महापुरुष जन्म लेकर समाज को दिशा देते हैं। आचार्य जयमल महाराज ने भी ऐसे ही समय में जन्म लेकर धर्म की ध्वजा को ऊँचा किया। उन्होंने उनकी ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा, आगम ज्ञान, राजा-महाराजाओं को व्यसनों से मुक्त कराने, और तीव्र स्मरण शक्ति जैसे गुणों की अध्यात्मिक व्याख्या करते हुए समझाया। इस मौके पर आए आचार्य नित्यानंद सुरीश्वर आदि ठाणा ने कहा कि शहर के लिए यह सौभाग्य कि ऐसे संत की साधना भूमि पर जन्मोत्सव का आयोजन हो रहा है। इस दौरान जेपीपी फाउण्डेशन की ओर से स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम जय जाप अभिमंत्रित रजत कलश की बोली का लाभ मिलापचंद, केवलचंद, प्रसन्नमल, मनमोहनमल, गौतमचंद, ललित कुमारव लोकेश कुमार लोढ़ा परिवार को मिला। इनको मिला मेडल प्रवचन प्रश्नोत्तरी में राजेश नाहटा और रसीला सुराणा को सही उत्तर देने पर रजत मेडल प्रदान किया गया। जय जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित अम तप का प्रत्याख्यान हुआ। इसमें शांतिलाल भूरट, पूनमचंद बैद, जितेन्द्र चौरडिय़ा, पारसमल भूरट, विनिता पींचा, और रीटा ललवाणी आदि का विशेष सहयोग रहा।
आचार्य जयमल महाराज की विशेषताएं
इनका जन्म लांबिया में हुआ था। अद्भुत स्मरण शक्ति के धनी थे। मात्र तीन घंटे में प्रतिक्रमण व पाँच आगम सूत्र कंठस्थ कर लिया था। ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा विवाह के छह महीने बाद ही ले ली थी। इन्होंने यति वर्ग में सुधार और धर्म की सच्ची साधना की राह प्रशस्त की। खींचन, फलौदी, जोधपुर, जालोर, बालोतरा आदि में धर्म की अलख जगाने के साथ ही राजाओं व नवाबों को व्यसनों का त्याग कराया था।