नागौर. कृषि उपज मंडी में सीजन की फसल के तौर आए जीरे ने बाजार में हलचल मचा दी है। लगभग तीन माह से 18 हजार से 20 हजार प्रति क्विंटल पर बिक रहा जीरा दो दिन पहले ही 22 हजार प्रति क्विंटल पर बिका था। अब सोमवार को कृषि मंडी खुली तो जीरे की शुरू हुई नीलामी की बोली अपने उच्चतम दर 24 हजार प्रति क्विंटल की दर पर जा पहुंची। शुरू में तो काश्तकार सामान्य रहे, लेकिन नीलामी में जीरे के भाव बढ़े तो वह भी उत्साहित नजर आए। जीरे के बढ़े भावों के साथ ही इसकी आवक में भी तेजी आई है। सीजन की शुरुआत पांच से छह हजार बोरियों से शुरू हुई थी, लेकिन सोमवार को जीरे की आवक 15 हजार बोरियों तक जा पहुंची। यानि की एक ही दिन में लगभग 50 करोड़ का जीरा सोमवार को मंडी पहुंचा। जीरे की मंडी में एक सिरे से लेकर दूसरे सिरे तक ढेरिया नजर आ रही थी। हालांकि अन्य जिसों की भी आवक रही, लेकिन सोमवार को जीरे के बढ़े भावों के साथ ही इसकी बढ़ी आवक ने अन्य जिंसों की चमक को फीका कर दिया। कृषि उपज मंडी के व्यापारियों में पवन भट्टड़ का कहना है कि नए सीजन के साथ मंडी में जीरे की बेहतर गुणवत्ता ने इसकी मांग बढ़ा दी है। इसके चलते भाव भी बढ़े हैं। यही वजह रही कि सोमवार को मंडी के दोनो ही गेट व्यस्त रहे। पूरे परिसर में अन्य जिसों की अपेक्षा जीरा की नीलामी के स्वर ज्यादा गूंजते रहे। हालांकि बढ़े हुए भाव से काश्तकार प्रसन्न हैं, लेकिन कुछ काश्तकारों का कहना था कि इस बार गुणवत्ता बहुत अच्छी है। उम्मीद है कि भाव और भी ज्यादा बढ़ेेंगे। संखवास से आए काश्तकार सीताराम का कहना था कि चार से माह के बाद भाव बढ़े हैं। इनका कहना है कि दो साल पहले भी जीरा 50-60 हजार प्रति क्विंटल पर चला गया था। ऐसा होता है तो फिर काश्तकारों को ज्यादा फायदा होगा। मूण्डवा से आए किसान रूसी जाट ने कहा कि कभी भाव बढ़ गए तो अच्छा दाम मिल गया, लेकिन कई बार तो मेहनत करने के बाद भी अच्छे भाव नहीं मिलते हैं। ऐसे में एमएसपी की तर्ज पर इसका भी निर्धारण होना चाहिए। व्यवस्था ऐसी हो कि निर्धारित दर से नीचे की खरीद ही न सके। ताकि किसानों को फसल बेचान करने की ज्यादा चिंता भी नहीं रहेगी।
अन्य जिंसों की भी आवक
कृषि मंडी में अन्य जिंसों में सरसों की तीन हजार, ईसबगोल की दो हजार एवं मूंग की तीन हजार बोरियों की आवक हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि हालांकि मूंग पुरानी है, सीजन वाली नहीं है, लेकिन इसके बाद भी इसको लेकर आने वाले काश्तकारों को पता है कि भाव अब ज्यादा बढऩे नहीं हैं। ऐसे में उपज पुरानी होगी तो फिर खराब भी हो सकती है। इसलिए जो भी स्टॉक में किसानों ने रख रखी थी। वो अब मूं्रग की उपज लेकर भी आ रहे हैं।
नया सीजन का जीरा आने में अभी भी लगभग तीन माह का समय लग जाएगा। इसलिए भावों में नरमी यानि कि गिरने के संकेत बहुत कम ही नजर आ रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि नागौर में दर्जन भर से ज्यादा की संख्या में जीरा फैक्ट्रियां हैं। इसमें जीरे की मांग बराबर बनी हुई है। माना जा रहा है कि मांग के अनुरूप जीरा नहीं मिलने से अभी भावों में और भी ज्यादा उछाल आने की संभावना है। जीरा की आपूर्ति बेहद कम होने के बाद भी फैक्ट्रिंयों में जीरे की मांग सीजन के बराबर ही बनी हुई है।
जीरे की बेहतर आवक ने बढ़ाया कारोबार
जीरे की बेहतर आवक हो रही है। सीजन की शुरुआत में तो चार से पांच हजार बोरियां ही आ रही थी, लेकिन अब आवक करीब पंद्रह हजार बोरियों तक बढ़ गई है। भाव भी अच्छे मिलने से काश्तकार भी उत्साहित हैं।
मूलचंद भाटी, अध्यक्ष, कृषि उपजमण्डी व्यापार मण्डल नागौर