
नागौर. पशुपालन विभाग झोलाछाप पशु चिकित्सकों पर कार्यवाही करने के संदर्भ में हर साल आदेश तो निकालता है, लेकिन स्थिति यह है कि नागौर जिले के गांवों में पिछले पांच साल से एक भी जांच नहीं हुई। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पशु पालकों की ओर से इस संबंध में जब कोई मामला थाने में दर्ज कराया जाए या फिर पशु पालक खुद लिखित शिकायत देगा तो फिर जांच की जा सकती है, नहीं विभाग की ओर से इस प्रकार की जांच का कोई अभियान कार्यक्रम शुरू नहीं किया जाएगा। नतीजा यह कि भोले पशुपालक अब भी झोलाछापों के सहारे इलाज करा रहे हैं, और कुछ होता भी है तो वह प्रशासनिक जटिलता से बचने के चक्कर में शिकायत ही नहीं करते। पशु पालकों की इस नासमझी का फायदा उठाते हुए विभाग ने भी चुप्पी साध रखी है।
आदेश फिर जारी, जांच या सर्वे नहीं होगा
राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा परिषद ने 18 सितम्बर को आदेश जारी कर सभी संयुक्त निदेशकों को झोलाछापों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लेकिन यह आदेश भी पहले जैसे आदेशों की कतार में जुड़ गया है। गांवों में असली तस्वीर जानने के लिए विभाग ने पांच साल से न तो खुद जांच की और न ही कोई अभियान चलाया। बताते हैं कि गांवों के अधिकांश पशुपालक पढ़े-लिखे नहीं हैं। उन्हें यह फर्क समझ नहीं आता कि सामने वाला असली पशु चिकित्सक है या झोलाछाप। इलाज में गड़बड़ी होने की स्थिति में भी वह शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं, और इसे भगवान की मर्जी मानकर स्वीकार कर लेते हैं। यही वजह रही है कि पशुपालन विभाग एवं थानों तक पहुंच ही नहीं पाती है।
विभाग ने पांच साल में एक बार नहीं चलाया जांच अभियान
पशुपालन विभाग की झोलाछाप पशु चिकित्सकों के संदर्भ में अब तक कितने जांच अभियान या सर्वे कराया गया है कि पड़ताल की गई तो पता चला कि वर्ष 2020 से लेकर वर्तमान में वर्ष 2025 तक विभाग की ओर से जिले की किसी भी ग्राम पंचायतों में झोलाछाप पशु चिकित्सकों की जांच करने का कोई अभियान नहीं चलाया गया। यही नहीं, बल्कि ब्लॉकवार तैनान चिकित्सा प्रभारियों केा भी इस प्रकार की जांच करने के लिए कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किया गया। जबकि जानकारों का कहना है कि चिकित्सा विभाग की तर्ज पर पशुपालन विभाग की ओर से भी इस संदर्भ में जांच अभियान चलाया जाए तो फिर सही वस्तुस्थिति सामने आ जाएगी।
यह है प्रावधान
भारतीय पशु चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1984 की धारा 56 और 57 के तहत झोलाछाप प्रैक्टिस करने पर पहली बार दोषी पाए जाने पर एक हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। दोबारा दोषी पाए जाने पर छह माह तक का कारावास और पांच हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
राज्य में कहीँ अपंजीकृत/गैर पंजीकृत व्यक्तियों (झोलाछाप) द्वारा पशुओं की चिकित्सा करते हुए पाए जाते है तो उनके खिलाफ भारतीय पशु चिकित्सा परिषद अधिनियम1984 की विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की जाती है इस हेतु राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा परिषद ने सभी सयुंक्त निदेशको को पत्र जारी किया है। झोलाछाप पशु चिकित्सा से ना केवल पशुओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होता है बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी बहुत बुरा असर पड़ रहा है ।
डॉ. सुरेन्द्र सिंह किरडोलिया, सदस्य, राजस्थान राज्य चिकित्सा परिषद
इनका कहना है ….
पशु पालकों के पशुओं के साथ यदि कोई घटना होती है तो फिर वह थाने में मामला दर्ज करा सकते हैं। ऐसी गतिविधियिों के होने पर इसकी शिकायत वह विभाग को कर सकते हैं तो फिर जांच की जा सकती है। इस संबंध में अभियान चलाने जैसी कोई बात नहीं है।
डॉ. महेश कुमार मीणा, संयुक्त निदेशक पशुपालन नागौर