
नागौर. जयमल जैन पौषधशाला में चल रहे चातुर्मास प्रवचन में जैन समणी . सुयशनिधि ने कहा कि भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान अक्सर सोचता है कि केवल बड़े बदलाव से ही जीवन सुधर सकता है, लेकिन सच्चाई यह है कि छोटे-छोटे कदम और आदतें ही जीवन को महान दिशा देती हैं। उन्होंने कहा कि आदतें केवल दिनचर्या नहीं हैं, बल्कि आत्मा को ऊँचाई पर ले जाने वाली सीढिय़ाँ हैं। उन्होंने जीवन में सत्य बोलने और ईमानदारी से जीने के महत्व पर जोर दिया। सजगता हमें यह पहचानने की क्षमता देती है कि कौन-सी आदत हमें बंधन की ओर ले जा रही है और कौन-सी मुक्ति की ओर ले जाता है। संतुलित आदतें मन, वचन और कर्म को स्थिर करती हैं, जबकि प्रेरणा उन्हें टिकाऊ ऊर्जा प्रदान करती है। सही आदतें अंतत: आत्मा में परिवर्तन लाकर उसे ऊँचाई तक पहुँचाती हैं। उन्होंने कहा कि छोटी आदतें बनाती हैं और आदतें हमें बनाती हैं। बुरी आदतें व्यक्ति का धीरे-धीरे पतन कर देती हैं, जबकि अच्छी आदतें आत्मोन्नति का मार्ग प्रशस्त करती हैं। श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि एक छोटा संकल्प लेकर एक बुरी आदत छोड़ें, और एक अच्छी आदत अपनाएं। यही संकल्प जीवन में बड़ा बदलाव लाने के साथ ही आत्मिक शांति, संतोष एवं साधना का मार्ग खोलेगा।
प्रश्नोत्तर और पुरस्कार वितरण
संघ मंत्री हरकचंद ललवाणी ने बताया कि प्रवचन में प्रश्नों के सही उत्तर देने पर लीला देवी लोढ़ा और मूलचंद ललवाणी को रजत मेडल से सम्मानित किया। चार बोनस प्रश्नों के उत्तर देने वालों में अंकित ललवाणी, ललिता छल्लाणी, संतोष देवी चौरडिया और सपना ललवाणी को भी सम्मानित किया गया। महावीरचंद भूरट, संजय पींचा, सुरेश जैन, राजू ललवाणी, नरपतचंद ललवाणी आदि मौजूद थे।