नागौर. बंशीवाला मंदिर परिसर में चल रही रामलीला में सोमवार को दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। रामलीला में भगवान राम जन्म, सीता जन्म, विश्वामित्र व दशरथ संवाद के साथ ताडक़ा वध के हुए दृश्यों ने पौराणिक कालीन युग को जीवंत कर दिया। विश्वामित्र का अपने यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ से भगवान राम को मांगना, और दशरथ का संकोच के साथ अप्रत्यक्ष से मना करने का प्रयास करना, फिर भगवान के जन्म के मूल उद्देश्य से विश्वामित्र के अवगत कराने पर भगवान राम व लक्ष्मण का यज्ञ की रक्षा करना, फिर ताडक़ा का हुंकार करते हुए भगवान राम के सामने आना सरीखे दृश्यों के साथ ही संवाद अदायगी से श्रद्धालु मंत्र-मुग्ध रहे। इसके पश्चात भगवान ने ताडक़ा वध कर अहिल्या का उद्धार किया तो श्रद्धालु जय श्रीराम के जयघोष करते नजर आए। इस दौरान मंदिर परिसर का चौक चारों ओर श्रद्धालुओं से भरा रहा। रामलीला में सोमवार को दुर्गा व्यास, धनिशा सोलंकी, कोमल जैन, जितेन्द्र गोयल, सुरेश जैन, प्रभात सोनी, प्रेमलता जैन, बसुन्धरा तिवारी, जाह्नवी सोनी, आकाश तिवारी, अजय शर्मा, देव तिवारी, नुकुल, प्रिन्सी सेन, स्नेहा जैन, भंवरलाल, रमेश, रामू, सचिन, अमृत, विनिता दिवारी, सोमेश, श्याम, विशाल आदि ने भूमिकाएं निभाई।
पैसठिया यंत्र आधि-व्याधि व उपाधि का नाश कर समाधि प्रगट करता है
जयमल जैन पौषधशाला में पैंसठिया यंत्र का सजोड़े किया जाप
नागौर. जयमल जैन पौषधशाला में सोमवार को पैसठिया यंत्र का सामूहिक रूप से जोड़ों के साथ पाठ किया गया। इसमें कुल ४१ जोड़े शामिल हुए। पुरुष वर्ग सफेद वस्त्र व महिला वर्ग लाल चुनड़ी की साड़ी में शामिल हुई। इस मौके पर साध्वी बिंदुप्रभा ने पैसठिया यंत्र की महत्ता समझाते हुए कहा कि यह विशिष्ट यंत्र आधि-व्याधि और उपाधि का नाश कर व्यक्ति के जीवन में समाधि प्रगट करता है। इसका विधिवत साधना कर व्यक्ति अपने इच्छित फल को प्राप्त कर सकता है और अपने सिद्धि का द्वार खोल सकता है। यह यंत्र आत्मा को नव्यता, दिव्यता और भव्यता प्रदान करता है। इसको करने के लिए भाव के साथ ही पूरा समर्पण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्य कोई भी हो, लेकिन करने का भाव मन से नहीं, केवल ऊपरी हो तो फिर उस कार्य के होने में संदेह रहता है। इसके विपरीत भाव के साथ ही यानि की शरीर एवं आत्मा एक भाव से किसी कार्य को करने के लिए कटिबद्ध हो जाएं तो उस कार्य के सफलता के अवसर बढ़ जाते हैं। इसी तरह से इसकी आराधना है। इसे साधना की तरह करना होगा। कहने का अर्थ यह है कि साधना एक सााधक ही कर सकता है। साधक हर कोई नहीं हो सकता है। साधक बनने के लिए पूरा समर्पण होना चाहिए।
इनको मिला प्रभावना का लाभ
पैंसठिया यंत्र जाप की प्रभावना, लक्की ड्रा पुरस्कार व प्रवचन की प्रभावना का लाभ अभय कुमार, संजय कुमार, साजन कुमार, लालचंद कांकरिया को मिला। दोपहर को सुशील धरम आराधना भवन में जाप किया गया। इसकी प्रभावना का लाभ सरला देवी, विजय कुमार, महेंद्र कुमार, दौलत ललवानी को मिला। जैनाचार्य जयमल महाराज के जन्मदिवस पर तेला तप करने वाले आराधकों का बुद्धराज, सुरेशचंद बोहरा की ओर से चांदी के सिक्के से बहुमान किया गया। चातुर्मास के मुख्य लाभार्थी बनने का सौभाग्य चंपालाल, विजयसिंह, रणजीतमल, धनेश, प्रियंक, मिवान पींचा को मिला।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां अर्पित
नागौर. रामपोल सत्संग भवन में महंत मुरलीराम महाराज के सानिध्य में चल रहे पंच कुण्डीय यज्ञ में चौथे दिन सोमवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित की। हवन के दौरान नंदकिशोर बजाज, नंदलाल प्रजापत, भगवानदास तापडिय़ा, रामस्वरूप चाण्डक, शिवप्रसाद टाक, हीरालाल भार्गवत आदि ने आहुतियां डाली। बाद में प्रसाद का वितरण किया गया।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां अर्पि त
नागौर. आर्य समाज मंदिर में चल रहे गायत्री महामंत्र हवन के चौथे दिन यानि की सोमवार को भी आहुतियां अर्पित की गई। इस दौरान भोजराज सारस्वत, मंजू देवी, रामकुमार चौधरी, सरिता ,मुरली मनोहर, रजनी ,राजू, कंचन, शिम्भू, कमला सैनी , राजाराम चांडक, रामेशवरी देवी, कार्तिक आचार्य पूजा देवी, चंद्र प्रकाश अग्रवाल ,,गजेंद्र परिहार ,घनश्याम पित्ती, वासुदेव अग्रवाल ,उमा व्यास, पूजा व्यास, सरजू ,कांता देवी, किशन, शांतिलाल ,दामोदर आदि ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां डाली। इस मौके पर मुख्य ट्रस्टी भोजराज सारस्वत ने गायत्री महामंत्र की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। अब तक एक लाख २१ हजार आहुतियां अर्पित की जा चुकी है।
नवपद की आराधना अक्षय सुख को प्रदान करती है
नागौर. कनक आराधना भवन में चल रहे प्रवचन में साध्वी मृगावती ने कहा कि नवपद की आराधना से जन्म-जरा-मृत्यु के महा भयंकर रोग से मुक्ति मिलती है। यह अक्षय सुख को प्रदान करने वाली आराधना है। इस आराधना से ही बाह्य-अभ्यंतर सुख की प्राप्ति होती है। नवपद कीआराधना करके भूतकाल में असंख्य आत्माएं मोक्ष में गई हैं। साध्वी सुप्रिया ने कहा कि दीपावली, रक्षाबंधन, पर्युषण आदि पर्व साल में एक बार आते है, लेकिन शाश्वत नवपद ओली साल में दो बार चैत्र मास व आसोज मास में आती है। अरिहंत के बिना जैन जगत संभव ही नहीं है। अरिहंत की वास्तविक भक्ति देखनी है तो उनके प्रति पूर्ण समर्पण जरूरी है। अरिहंत के बिना नवपद के बाकी आठ पद भी संभव नहीं है। अरिहंत, सिद्ध,आचार्य, उपाध्याय, साधु, दर्शन, ज्ञान, चारित्र और तप की साधना ही नवपद ओली आराधना का सार है। यह आराधना आत्मिक एवं शारीरिक आरोग्य बढ़ाती है,कर्मों की निर्जरा तथा शारीरिक व्याधि को दूर करती है।
नागौर. नवपद की आराधना
मुख्यमंत्री व निदेशक को भेजा ज्ञापन
नागौर. आयुर्वेद विभाग में नियम विरुद्ध नर्सेज की प्रतिनियुक्ति करने के आरोप को लेकर अखिल राजस्थान राज्य आयुष नर्सेज महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष छीतरमल सैनी ने सोमवार को विभाग के निदेशक एवं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन भेजा। सैनी ने दिए गए ज्ञापन में कहा कि राज्य सरकार की ओर से गत 18 अगस्त 2020 को एक आदेश जारी कर कहा गया था कि जिन औषधालयों में नर्सेज व चिकित्सकों के पद रिक्त है या औषधालय बंद पड़े हैं। उन औषधालयों में सप्ताह में दो दिवस निकटवर्ती औषधालय से सर्वप्रथम चिकित्सक को लगाया जाए। राज्य सरकार के आदेश के बाद भी प्रदेश के कई जिलों में इसकी पालना नहीं की जा रही है, बल्कि नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्तियां की जा रही है। इसकी वजह से चिकित्सालयों का कार्य प्रभावित हो रहा है। चेताया कि इस पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में मजबूरी में संघ को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।