नागौर. रामदेव पशु मेला नागौर बैलों के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए मशहूर है। इस विरासत को संजोये रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। यह बात जिला कलक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने गुरुवार को जोधपुर रोड स्थित पशुमेला मैदान में आयोजित रामदेव पशु मेले के शुभारम्भ समारोह में कही। सुबह 11 बजे से कलक्टर ने झण्डारोहण कर पशुमेले का विधिवत शुभारम्भ किया।
उन्होंने कहा कि एक समय इस पशु मेले में 70-70 हजार पशुओं की आवक होने के साथ बिक्री भी होती थी। मेले से पशुपालकों को बेहतर आय होती थी। मेड़ता के बलदेवराम पशुमेला से पशु परिवहन के दौरान हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं नहीं हो इसके लिए प्रशासन प्रयास कर रहा है। प्रशासन के प्रयासों से कई पशुपालकों को राहत मिली। उन्होंने कहा कि रामदेव पशुमेला ऐसी विरासत है, जिसे देखने विदेशी पर्यटक तक आते हैं। इस विरासत से युवा पीढ़ी को परिचित कराना होगा। समारोह की अध्यक्षता करते हुए पुलिस अधीक्षक नारायण टोगस ने कहा कि मेले में पशुपालकों की सुरक्षा व व्यवस्था के माकूल प्रबंध किए हैं । पद्मश्री हिम्मताराम भांभू ने कहा कि पशु किसानों का जीवनसाथी हैं। इसका महत्व समझना होगा। पशुधन की गुणवत्ता बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। पॉली क्लीनिक प्रभारी एवं उपनिदेशक डॉ. नरेन्द्र चौधरी ने पशु मेला की महत्ता पर प्रकाश डाला। पशु मेला प्रभारी एवं संयुक्त निदेशक डॉ. महेश कुमार मीणा ने पशु मेला में 12 फरवरी तक होने वाली गतिविधियों की जानकारी दी।
पशुओं की संख्या पहुंची 700
रामदेव पशु मेला का शुभारंभ होने के प हले दिन यानि की गुरुवार को शाम तक कुल 700 पहुंच चुके थे। गुरुवार को आने वाले पशुओं में सर्वाधिक आवक ऊंटों की रही है। पशु मेला में भी ऊंटों की संख्या अब तक ज्यादा रही है। गुरुवार को आने वाले पशुओं में गोवंश-70, ऊंट 180 एवं घोड़े-23 पहुंचे। कुल 700 पशुओं में 406 तो केवल ऊंट हैं, और शेष अन्य में गोवंश, भैंसवंश एवं घोड़े रहे हैं। इस तरह से अब तक मेले में 262 गोवंश पहुंच चुके हैं। जबकि घोड़े 29 व ऊंट 406 आ चुके हैं।
उद्घाटन समारेाह में बैनर से गायब रहे नागौरी बैल
रामदेव पशु मेला शुभारंभ होने के दौरान कार्यक्रम स्थल के पास लगे बैनर में से पहली बार नागौरी बैलों का चित्र गायब रहा। इसको लेकर भी पशु मेला में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। लोगों का कहना था कि इस पूरे मेले की पहचान ही नागौरी बैलों से रही है। इसके बाद भी कार्यक्रम के प्रमुख बैनर से नागौरी बैलों का गायब होना जिम्मेदार अधिकारियों का रामदेव पशु मेला के प्रति गंभीरता को दर्शाता है। इससे साफ है कि अधिकारी यह आयोजन तो करा रहा है, लेकिन यह आयोजन केवल खानापूर्ति बनकर रह गया।
पशुपालकों से पूछी समस्याएं
कार्यक्रम में मंचासीन रहे अतिथियों में पूर्व प्रधान ओमप्रकाश सेन पशुपालकों के बीच पहुंचे, और उनकी समस्याएं पूछी। इस दौरान हनुमानराम, गोपालराम, भियाराम बातचीत कर उनकी समस्याएं पूछी। पशुपालकों ने बताया कि यूं तो स्थिति ठीक है, लेकिन मेला मैदान और ज्यादा समतल होता तो सही रहता। पशुपालको से प्रधान ने कहा कि मेला के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति होती है, रहने व मेले से जुड़ी किसी भी प्रकार की समस्या के लिए पशुपालक उनसे संपर्क कर सकते हैं।