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Nagaur patrika…खनिज परिवहन में जीपीएस की अनदेखी: निगरानी में बड़ी चूक…VIDEO
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Nagaur patrika…खनिज परिवहन में जीपीएस की अनदेखी: निगरानी में बड़ी चूक…VIDEO

नागौर. खनिज परिवहन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए शासन स्तर से वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाने के लिए आए दिशा-निर्देशों की पालना अब तक नहीं की जा सकी है। इसकी वजह से यह योजना कागजों तक ही सीमित रह गई है। जिले में अधिकांश परिवहन वाहन बिना जीपीएस […]

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नागौर. खनिज परिवहन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए शासन स्तर से वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाने के लिए आए दिशा-निर्देशों की पालना अब तक नहीं की जा सकी है। इसकी वजह से यह योजना कागजों तक ही सीमित रह गई है। जिले में अधिकांश परिवहन वाहन बिना जीपीएस उपकरण के ही खनिज ढुलाई कर रहे हैं। फलस्वरूप विभाग को इसकी वजह से करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

खनिज विभाग की ओर से करीब एक माह पूर्व खनिज पदार्थों के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले सभी वाहनों में जीपीएस लगाए जाने के दिशा-निर्देश आए थे। यह जीपीएस वाहन मालिक या लीजधारकों की ओर से लगवाने थे। शासन स्तर से इस निर्देश को आए एक माह से ज्यादा हो गया, मगर अब तक ऐसे वाहनों में जीपीएस नहीं लगाए जा सके। बताते हैं कि यह कदम इसलिए उठाया गया था ताकि खदान से खनिज गंतव्य तक पहुंचते समय हर वाहन की लोकेशन और यात्रा रिकॉर्ड निगरानी में रहे। लेकिन लीजधारकों ने इन नियमों को दरकिनार किया और वाहनों को पुराने ढर्रे पर ही चलाना जारी रखा।

प्रमुख खनिजों पर निगरानी की कमी

नागौर जिले में बड़े पैमाने पर जिप्सम क्वाट्र्ज एवं चूना पत्थर आदि की की लीजें संचालित हैं। इन खनिजों की ढुलाई ट्रकों और डंपरों से होती है। लेकिन जीपीएस की कमी के कारण न तो वाहनों का सही रिकॉर्ड मिल पा रहा है और न ही वास्तविक गंतव्य की जानकारी। खदान से गंतव्य तक की दूरी और मार्गों की जटिलता के कारण बिना निगरानी के कई वाहन अवैध रास्तों से गुजऱ जाते हैं। इससे न केवल सरकारी राजस्व पर असर पड़ता है बल्कि खनिज चोरी की घटनाओं में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

इन क्षेत्रों से गुजर रहे खनिज पदार्थों से लदे वाहन

रियाबड़ी, मेड़ता, पादुकला, थांवला, रोल, गोटन, जसनगर, खाटू, नागौर आदि क्षेत्रों में एक दर्जन थानाक्षेत्रों से होकर खनिज पदार्थों से लदे वाहनों को गुजरते कभी भी देखा सकता है। बताते हैं कि अकेले नागौर जिले में ऐसे वाहनों की संख्या करीब ढाई से तीन हजार की है। अब ऐसे में जीपीएस इन वाहनों में लग जाए तो फिर निश्चित रूप से रियल टाइम ट्रेकिंग की जा सकेगी।

यह काम किया तो विभाग को मिलेगा अच्छा राजस्व

सभी खनिज वाहनों में जीपीएस उपकरण ’’अनिवार्य’’ रूप से लगाएं जाने के साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले लीजधारकों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही खनिज परिवहन मार्गों पर नियमित निगरानी की व्यवस्था करने के अलावा रियल टाइम ट्रेकिंग का प्रबंधन भी होना चाहिए।

इसलिए जीपीएस लगाया जाना जरूरी है

– वाहन की हर गतिविधि की ट्रैकिंग होगी

– अवैध खनन और चोरी पर अंकुश लगेगा

-सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान बचेगा

– परिवहन मार्ग और वाहन की वास्तविक जानकारी तुरंत उपलब्ध होगी

-पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली स्थापित होगी

जीपीएस नहीं लगने से यह हो रही समस्या

-परिवहन वाहनों पर निगरानी नहीं

-चोरी और अवैध खनन की खुली राह

– करोड़ों का राजस्व नुकसान

-प्रशासन की पकड़ कमजोर

इनका कहना है…

जीपीएस लगाए जाने के लिए दिशा-निर्देश तो आए थे, लेकिन इसकी समुचित गाइडलाइन फिर उसके बाद नहीं आई। इस संबंध में मुख्यालय स्तर पर बातचीत कर अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर यथोचित कदम उठाए जाएंगे।

जयप्रकाश गोदारा, खनि अभियंता, नागौर

जीपीएस लगाए जाने के बाद निश्चित रूप से रियल टाइम ट्रेकिंग की जा सकेगी इससे विभाग को भी निगरानी रखने में सहायता मिल सकेगी।

राकेश शेषमा, एमई, खनिज विभाग