नागौर. शहर में गोवंश धरपकड़ को लेकर नगरपरिषद की ओर से चलाए जा रहे अभियान की हकीकत सडक़ों पर साफ दिखाई दे रही है। चार दिनों से अभियान चलने के बावजूद शहर की मुख्य और व्यस्त सडक़ों पर गोवंश खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं। हालांकि अधिकारिक दावे में नगरपरिषद की ओर से कहा जा रहा है अभियान सख्ती से चलाया जा रहा है, लेकिन शहर की सडक़ों भटकते गोवंश खुद-ब-खुद इन दावों की सच्चाई बताते हुए नजर आ रहे हैं।
मुख्य मार्गों पर हर समय मौजूदगी: फिर भी परिषद को नहीं दिख रहा
नया दरवाजा, सलेऊ रोड, स्टेशन रोड, रामपोल, किले की ढाल, सदर बाजार, गांधी चौक, तहसील चौक, ए रोड, बी रोड, दरगाह रोड, दिल्ली दरवाजा, केन्द्रीय बस स्टैंड, मूण्डवा चौराहा, कॉलेज रोड, बीकानेर रोड, मानासर चौराहा और जोधपुर रोड जैसे इलाकों में दिनभर गोवंशों की आवाजाही बनी रहती है। यह वही मार्ग हैं, जहां यातायात का दबाव सबसे अधिक रहता है, फिर भी यह गोवंश हटाने की जगह नगरपरिषद अभियान को जोर-शोर से चलाने का दावा करने में लगा हुआ है।
यातायात व्यवस्था पर सीधा असर: हादसे की आशंका
सडक़ों पर बैठे और अचानक दौड़ते गोवंश यातायात के लिए बड़ी बाधा बन चुके हैं। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को हर समय सतर्क रहना पड़ता है। कई स्थानों पर वाहन रुकने से जाम की स्थिति बन जाती है, वहीं अचानक ब्रेक लगने से हादसों की आशंका भी बनी रहती है। इसके बावजूद जिम्मेदारों की ओर से समस्या को गंभीरता से लेते हुए ठोस कदम नहीं उठाए गए।
सुबह-शाम हालात और बिगड़े
स्टेशन रोड के राजेश सोनी, बी रोड के नरेश मेघवाल और सदर बाजार के अशोक कच्छावा बताते हैं कि गोवंशों के कारण रोज़ाना जाम और दुर्घटना का खतरा बना रहता है। गांधी चौक निवासी मोहनलाल जोशी व कॉलेज रोड के इमरान खान के अनुसार शाम के समय हालात ज्यादा बिगड़ जाते हैं, लेकिन अभियान का असर दिखाई नहीं देता। विशेषकर सुबह और शाम के समय स्थिति ज्यादा खतरनाक हो जाती है। कामकाजी लोग, विद्यार्थी और बुजुर्ग जब सडक़ों पर निकलते हैं, तब गोवंशों की संख्या ज्यादा दिखाई देती है। कई बार गोवंश आपस में भिड़ जाते हैं। जिससे सडक़ पर अफरा-तफरी मच जाती है और राहगीरों को जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ता है।
अभियान के नाम पर औपचारिकता
नगरपरिषद की ओर से धरपकड़ अभियान के नाम पर कुछ इलाकों में औपचारिक कार्रवाई जरूर की जाती है, लेकिन यह शहरव्यापी नहीं होती। गिने-चुने पशुओं को पकडकऱ अभियान की औपचारिकता पूरी कर ली जाती है, जबकि बाकी क्षेत्रों में स्थिति जस की तस बनी रहती है। यदि कार्रवाई प्रभावी होती, तो शहर के प्रमुख चौराहों और सडक़ों पर गोवंशों की यह चहलकदमी नहीं दिखाई देती।
सकारात्मक परिणाम जल्द नजर आएगा
सडक़ों पर घूमते गोवंशों की धरपकड़ के लिए अभियान चलाया जा रहा है। चार दिनों में ही 50 से ज्यादा गोवंश पकड़े गए हैं। शहर में जहां भी समस्या है, उसे देखवा लिया जाएगा।
गोविंद सिंह भींचर, आयुक्त नगरपरिषद