नागौर। गणेश चतुर्थी का महापर्व बुधवार को मनाया जाएगा। इस अवसर पर गणाधिपति वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विराजित किए जाएंगे और शहर के विभिन्न मंदिरों में विशेष तैयारियां जोरों पर हैं। खासतौर पर गणेश बावड़ी में भव्य मेला और पूजा आयोजन किया जाएगा। होने वाले उत्सव की तैयारियां की जा रही है है। मंदिर परिसर में विशेष सफाई, सजावट और शृंगार कार्य किया जा रहा है। शहर के अन्य क्षेत्रों में भी गणपति की प्रतिमाएं विराजित कराई जाएंगी। गणेश बावड़ी में बुधवार को मेला सुबह पांच बजे से देर रात तक आयोजित रहेगा। मेले में भक्तों के लिए मनोरंजन, प्रसाद वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखे गए हैं। दोपहर सवा बारह बजे महाआरती होगी, जिसमें नगर के गणपति को 111 किलो मोदक का भोग चढ़ाया जाएगा। गणेश बावड़ी में बुधवार को मेला सुबह पांच बजे से देर रात तक आयोजित रहेगा। मेले में भक्तों के लिए मनोरंजन, प्रसाद वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखे गए हैं। दोपहर सवा बारह बजे महाआरती होगी, जिसमें नगर के गणपति को 111 किलो मोदक का भोग चढ़ाया जाएगा।
शुभ योग में पूजन का रहेगा विशेष महत्व
नागौर. गणेश चतुर्थी बुधवार को शुभ योग में मनाई जाएगी। इस दिन चंद्रमा कन्या राशि तथा चित्रा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। साथ ही शुक्ल और शुभ योग का संयोग होने से धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि गणपति स्थापना में इस दिन विशेष महत्व रखता है।
गणपति पूजा का शुभ समय
पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि गणपति पूजन के लिए वृश्चिक लग्न दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से 2 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, आवश्यकता अनुसार पूजा सुबह 6 बजकर 05 मिनट से 9 बजकर 10 मिनट तक तथा 11 बजकर 01 मिनट से 12 बजकर 16 मिनट तक भी की जा सकती है। उन्होंने बताया कि यह पूजा प्रक्रिया सायंकाल के समय भी दोहराई जाती है, ताकि दिन भर गणेशजी की उपासना बनी रहे। पूजा के बाद किसी ब्राह्मण को भोजन और दान देकर स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिए।
गणपति पूजन की विधि
सुबह स्नान के बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें। घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर गणपति की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा पर गंगा जल का अभिषेक करें और सिंदूर, दूर्वा, लाल फूल, मोदक, नारियल, गन्ना, फल और नैवेद्य अर्पित करें। इस दौरान गणेश चालीसा, अथर्वशीर्ष या गणपति स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है। पूजन के समापन पर घंटा या शंख बजाकर गणपति की आरती करें। ध्यान रखें कि पूजन में तुलसी का बिलकुल प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह पूरी तरह निषेध है।