
नागौर. जिला मुख्यालय के शहरी एरिया में एक कॉलोनी ऐसी भी है, जहां पर पिछले 19 साल से कोई सडक़ नहीं बनाई गई है। ऐसा स्थानीय बाशिंदों का कहना है। हालांकि यह बात गले से नहीं उतरती, लेकिन स्थानीय निवासियों के अनुसार यह सच है। इस दौरान कई जनप्रतिनिधि आए, और अपना कार्यकाल पूर्ण कर चले गए। किसी ने भी हाउसिंग बोर्ड के सेक्टर नंबर दो के आंतरिक एरिया में सडक़ें नहीं बनवाई। लोग बताते हैं कि उन्नीस वर्ष पुरानी जर्जर डामर रोड पर ही डामर चढ़ाकर इतिश्री कर ली गई थी। इसके बाद से तो इस क्षेत्र की सडक़ों की हालत खूब ज्यादा बिगड़ गई, लेकिन इसमें तो डामर तक नहीं चढ़ाई गई।
कच्ची सडक़ कर करना पड़ता सफर
स्थानीय बाशिंदों में रवि कुमार माथुर, भंवरलाल गांगल, रामकिशन शर्मा व भागीरथ शर्मा से बातचीत हुई तो बताया कि वर्ष 2005 में पहले खराब व पुरानी सडक़ पर डामर चढ़ाकर इतिश्री कर ली गई थी। डामर तो पहली बरसात में ही उधड़ गई थी। इसके बाद से लगातार सडक़ की हालत बिगड़ती चली गई। अब तो सडक़ पर हर दो मीटर की दूरी पर खड्डे हो चुके हैं। इस पर चलना मुश्किल है, विशेषकर बरसात के दौरान इस पूरे मार्ग पर कई जगह मिनी तालाब बनने के साथ ही दरिया बहता रहता है।
51 बार ज्ञापन दे चुके, फिर भी सडक़ नहीं बनी
क्षेत्र के हरिराम पंवार बताते हैं कि केवल सडक़ बनाने के लिए स्थानीय निवासियों की ओर से अब तक 51 बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं। यह ज्ञापन नगरपरिषद आयुक्त, स्थानीय जनप्रतिनिधि, चेयरमैन एवं जिला कलक्टर तक को दिए जा चुके हैं। इसके बाद भी लोगों की ओर से सिवाय आश्वासन के अतिरिक्त कुछ भी नहीं मिला। किसी ने भी सडक़ नहीं बनवाई।
जनता की जुबानी: नहीं बनी सडक़
बेहद अफसोसजनक स्थिति है कि हम भी शहर में रहते हैं। इसके बाद भी हमारे क्षेत्र में सडक़ें नहीं बनवाई जाती है। विश्वास नहीं होता है कि पिछले 19 साल से हम सडक़ बनवाए जाने की मांग कर रहे हैं।
कैलाश वर्मा, स्थानीय निवासी
हमारे बच्चे छोटे से अब युवा हो चुके हैं। आज तक अपने क्षेत्र में उनको पक्की सडक़ की सुविधा नहीं मिल पाई है। कई बार यह हुआ कि कॉलोनी ही छोडकऱ चले जाएं। यह बेहद अफसोसजनक स्थिति है।
रामकिशन शर्मा, स्थानीय निवासी
बरसात में लोग पकौड़ों का लुफ्त उठाते हैं, लेकिन बरसात का मौसम आते ही हम लोग डर जाते हैं। कारण कि पूरे सडक़ पर केवल पानी का दरिया बहता रहता है, बल्कि इसका पानी घरों के अंदर भी घुस जाता है।
विजय माथुर, स्थानीय निवासी
विडंबनापूर्ण स्थिति है कि शहर की सबसे पुरानी कॉलोनियों में एक होने के बाद भी हम मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे है। जबकि आवागमन के लिए एक बेहतर सडक़ यानि की परिवहन आदि के लिए यह हमारे मूलाधिकार में है।
मूलचंद डांगी, स्थानीय निवासी