
नागौर. मसाला सौंफ न केवल ज्यादा पानी वाली उपज होती है, बल्कि मेहनत भी अन्य फसलों की अपेक्षा इसमें अधिक होती है। इसके बाद भी मंडी आने वाले किसानों को भाव बेहतर नहीं मिल पा रहे हैं। यही वजह रही कि इस उपज की बुआई से अब काश्तकारों का मोह भंग होने लगा है। गत एक साल के दौरान सौंफ ऐसी उपज रही कि इसके भाव सात से आठ हजार तक ही स्थिर रहे। गत मार्च में सीजन के दौरान भी यही भाव थे। इस समय सीजन नहीं हेाने के बाद भी इसके भावों में कोई विशेष उतार चढ़ाव नहीं रहा। इस संबंध में काश्तकारों से बातचीत हुई तो इनका कहना था कि इस फसल की बुआई से लेकर उत्पादन तक अथक कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके बाद भी भाव बेहतर नहीं मिलने के कारण अब दूसरी उपज के उत्पादन में अपना ध्यान लगाएंगे, ताकि मेहनत का उचित फल तो मिले।
मसाला फसलों में अब सौंफ का रुतबा घटना लगा है। गत छह सालों में जिले की बुआई एरिया में भी काश्तकारों की खेतों में लहलहाने वाली सौंफ की बुआई का एरिया प्रतिवर्ष घटा है। स्थिति यह रही है कि रकबा घटने के बाद उत्पादन भले ही कम हो गया हो, लेकिन इसके भाव मंडियों में नहीं बढ़े। सीजन में कृषि उपज मंडी में सौंफ की आवक चार से पांच हजार बोरियों में थी। अभी वर्तमान में इसका सीजन नहीं होने के कारण अब आवक अब 400-500 बोरियों तक रह गई है। इसके बाद भी प्रति क्विंटल इसके भावों में ज्यादा बढ़ोत्तरी की स्थिति नहीं रही। काश्तकारों की माने तो मसाला उपज में जीरा का ही रुतबा रहता है। यह कम से कम बीस हजार प्रति क्विंटल की दर से बिकती है, लेकिन सौंफ के भाव तो पूरे साल के दौरान 15 हजार प्रति क्विंटल तक नहीं पहुंच पाते। हालांकि गत दो सालों में वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 में इसका रकबा बढ़ा जरूर, लेकिन सौंफ के लगातार भावों में चल रही स्थिरता से अब इसका असर अगली बुआई पर पडऩे की आशंका बलवती होने लगी है।
छह साल में यह रहा सौंफ का रकबा
वर्ष रकबा
2018-19 9959
2019-20 7123
2020-21 5659
2021-22 4079
2022-23 12727
2023-24 26672
कृषि उपज मंडी में एक सप्ताह में भाव की स्थिति (प्रति क्विंटल)
डेट सौफ भाव न्यूनतम अधिकतम
17 6000 7850
18 6000 8000
19 6000 7900
20 6000 7850
21 6000 8000
22 6000 7900
किसानों ने कहा, अब सौंफ की खेती नहीं करेंगे
सौंफ की खेती करने से क्या फायदा। भाव तो अच्छे मिलते नहीं हैं। बुआई से लेकर मंडी पहुंचने तक किसानों का पूरा परिवार इसमें लगता रहता है। इसके बाद भी भाव अच्छे नहीं मिल पाते।
रामअवतार, किसान, मूण्डवा
सौंफ की खेती में न केवल पानी ज्यादा लगता है, बल्कि मेहनत भी खूब होती है। इसके बाद फिर इसकी पौध का ध्यान रखना पड़ता है। कई बार मौसम खराब हो जाता है। जैसे-तैसे कर लाते हैं तो भाव खराब मिलते हैं।
सहदेव, किसान, मूण्डवा
मसाला उपज में अब सौंफ खेती करने से कोई फायदा नहीं रहा। पूरे साल गुजर जाते हैं, लेकिन भाव वही छह से आठ हजार या सात हजार तक ही मिल पाते हैं। इसकी जगह दूसरी फसल की बुआई करना अब ज्यादा सही रहेगा।
सुरेश, किसान, मूण्डवा