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प्राइवेट बसों का रोडवेज बस स्टैंड के सामने व आसपास कब्जा, प्रशासन बना तमाशबीन…VIDEO

नागौर. जिला मुख्याल के केन्द्रीय रोडवेज बस स्टैंड के बाहर और आसपास बिना परमिट अवैध रूप से प्राइवेट गाडिय़ों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। पूर्व में हाईकोर्ट के जारी दिशा-निर्देशों के बावजूद तीन किलोमीटर के दायरे में वाहन ठहराने पर रोक लगने के बाद भी इनका संचालन जारी है। हालांकि रोडवेज प्रशासन […]

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नागौर. जिला मुख्याल के केन्द्रीय रोडवेज बस स्टैंड के बाहर और आसपास बिना परमिट अवैध रूप से प्राइवेट गाडिय़ों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। पूर्व में हाईकोर्ट के जारी दिशा-निर्देशों के बावजूद तीन किलोमीटर के दायरे में वाहन ठहराने पर रोक लगने के बाद भी इनका संचालन जारी है। हालांकि रोडवेज प्रशासन की ओर से कई बार इस गंभीर समस्या को जिला कलक्टर के समक्ष उठाया गया, लेकिन न तो परिवहन विभाग और न ही पुलिस प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई की गई । इस अनदेखी की वजह से रोडवेज को प्रतिदिन लाखों रुपये का राजस्व क्षति हो रही है।
बिना परमिट के चल रही बसें और रोडवेज का नुकसान
रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि प्राइवेट बसों के इस खुलेआम ठहराव की वजह से रोडवेज का राजस्व प्रतिदिन प्रभावित हो रहा है। केवल बस स्टैंड के स्तर पर ही रोजाना चार-पांच लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। पूरे जिले के स्तर पर यह आंकड़ा करोड़ों में बदल जाता है। इससे न केवल रोडवेज की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है बल्कि नई बसों की खरीद और संचालन पर भी असर पड़ रहा है।
जिला प्रशासन के सामने उठाया मुद्दा, कोई कार्रवाई नहीं
रोडवेज प्रशासन ने कई बार जिला कलक्टर के समक्ष बैठक में यह समस्या उठाई है। अधिकारियों का कहना है कि बावजूद इसके संबंधित विभागों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन की लापरवाही के कारण प्राइवेट बस संचालक मनमानी कर रहे हैं।
हाईकोर्ट आदेश और नियमों की धज्जियां
हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि बस स्टैंड के तीन किलोमीटर के दायरे में प्राइवेट बसें और अन्य सवारी वाहन नहीं खड़े हो सकते। बावजूद इसके, विजयबल्लभ चौराहा, मूण्डवा चौराहा और बस स्टैंड के सामने दर्जनों प्राइवेट बसें घंटों खड़ी रहती हैं। इससे न केवल ट्रैफिक जाम बढ़ता है बल्कि यात्रियों को भी असुविधा होती है।
अधिकारी क्या कहते हैं
जिला परिवहन अधकारी अवधेश नारायण चौधरी कहते हैं कि बिना परमिट गाडिय़ों की जांच एवं चेकिंग कर कार्रवाई की जाती रहती है। इसके लिए अक्सर अभियान भी चलता है। ट्रेफिक पुलिस इंचार्ज शिवदेव राम ने भी कहा कि नियमों के पालन के लिए अभियान चलाया जाएगा, लेकिन जमीन पर अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आई। र

एक नजर इस पर भी ……….
प्राइवेट बसें बिना परमिट लगभग 600-700
रोजाना रोडवेज राजस्व प्रभावित 4-5 लाख रुपये (केन्द्रीय बस स्टैंड स्तर पर)
जिले भर का कुल नुकसान लगभग 1.5-2 गुना
हाईकोर्ट निर्देश बस स्टैंड से 3 किमी दायरे में प्राइवेट बसें खड़ी नहीं हो सकतीं
रोडवेज की कुल बसों का संचालन-65

समाधान के सुझाव
. रोडवेज बस स्टैंड के आसपास नियमित चेकिंग और अभियान।
. हाईकोर्ट आदेश का सख्ती से पालन।
. अवैध प्राइवेट बसों के चालकों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई।
. यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त निगरानी।
. स्टैंड पर निगरानी कैमरा और नियम उल्लंघन की तुरंत रिपोर्टिंग।
इनका कहना है………
प्राइवेट बसों का रोडवेज बस स्टैंड के आसपास अवैध ठहराव न केवल राजस्व को प्रभावित कर रहा है बल्कि यातायात और सार्वजनिक सुविधा पर भी विपरीत असर डाल रहा है। जिले में परिवहन विभाग, पुलिस प्रशासन को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। हम तो यह मामला कई बार उठा चुके हैं।
मुकुन सिंह, मुख्य प्रबन्धक, केन्द्रीय बस स्टैंड नागौर