नागौर. इस बार शारदीय नवरात्रि का आगाज़ बेहद शुभ संयोगों के साथ हो रहा है। आश्विन माह की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि सोमवार को नवरात्रि का प्रारंभ ब्रह्म योग, शुक्ल योग और गजकेसरी राजयोग के साथ होगा। ज्योतिष के अनुसार, इन दुर्लभ संयोगों में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने से साधक को सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मंदिरों में भी नवरात्रि को लेकर तैयारियां देर रात्रि तक चलती रही।
घटस्थापना का मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 22 सितंबर को सुबह 6 बजकर 25 मिनट से 7 बजकर 55 मिनट तक घटस्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। वहीं, शुभ चौघडिय़ा प्रात: 9 बजकर 26 मिनट से 10 बजकर 57 मिनट तक और अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 3 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।
ग्रह-गोचर का विशेष संयोग
ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश प्रेम शर्मा के अनुसार, इस बार नवरात्रि पर कई विशेष योग बन रहे हैं—बुधादित्य राजयोग, भद्र राजयोग, धन योग बन रहा है। चंद्र-मंगल युति तुला राशि में बन रही है), त्रिग्रह योग बन रहा है। चंद्रमा-बुध-सूर्य की युति कन्या राशि में हो रही है। गजकेसरी राजयोग शुभ संयोग रहेगा। गुरु मिथुन राशि में और चंद्रमा कन्या राशि में रहेंगे। जिससे गजकेसरी राजयोग का निर्माण होगा।
सालों बाद आगमन व गमन दोनो ही शुभ रहेगा
देवीपुराण में वर्णित श्लोक के अनुसार, रविवार और सोमवार के दिन मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है, जिसे सुख और समृद्धि का सूचक माना गया है। प्रस्थान की बात करें तो इस वर्ष नवरात्रि का समापन गुरुवार को होगा। इस दिन मां दुर्गा नरवाहन से प्रस्थान करेंगी। नरवाहन का अर्थ है कि देवी भक्तजनों के कंधे पर सवार होकर जाती हैं। इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस प्रकार के प्रस्थान से साधक को सुख-शांति, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन के दुख और संकट दूर होते हैं। शास्त्रों के अनुसार मां दुर्गा किस वाहन पर आती और जाती हैं, उसका सीधा असर जन-जीवन पर पड़ता है। मां का हाथी पर आगमन सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा का प्रतीक माना जाता है, जबकि घोड़े पर आगमन संघर्ष और उथल-पुथल का संकेत देता है। नाव पर प्रस्थान सफलता और कार्यसिद्धि का सूचक है, वहीं डोली पर आना या जाना अशुभ और मृत्यु कारक माना जाता है। सबसे शुभ स्थिति तब होती है जब मां दुर्गा नरवाहन (भक्तजनों के कंधे पर) से जाती हैं। इसे सौभाग्य, सुख-शांति और समृद्धि का संकेत माना गया है।
नवरात्रि मुहूर्त एवं शुभ योग की स्थिति
प्रतिपदा तिथि आरंभ: 22 सितंबर
प्रतिपदा तिथि समाप्ति: 23 सितंबर, रात 2 बजकर 55 मिनट पर
घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 6 बजकर 25 मिनट से 7 बजकर 55 मिनट तक
शुभ चौघडिय़ा: सुबह 9 बजकर 26 मिनट से 10 बजकर 57 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक
विशेष योग: ब्रह्म योग, शुक्ल योग, बुधादित्य राजयोग, भद्र राजयोग, धन योग, त्रिग्रह योग, गजकेसरी राजयोग