नागौर. प्रदेश में आयुर्वेदिक चिकित्सालयों के भवनों के रखरखाव नहीं होने के कारण डेढ़ हजार से ज्यादा भवनों के गिरने का खतरा मंडराने लगा है। बेपरवाही के चलते हालत इतनी खराब हो चुकी है कि राज्य के लगभग साढ़े तीन हजार आयुर्वेदिक हॉस्पिटलों में 60 प्रतिशत भवनों की स्थिति अति गंभीर की श्रेणी में पहुंच चुकी है। इसके बावजूद ऐसे भवनों में भगवान भरोसे बैठकर आयुर्वेदिक चिकित्सा कर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने के लिए मजबूर हैं।
पिछले माह अलवर में भरभराकर गिरा था औषधालय
आयुर्वेदिक विभाग के जानकारों के अनुसार, अजमेर, अलवर, सीकर, नागौर, जयपुर, जोधपुर, सिरोही, प्रतापगढ़, करौली, पाली, बूंदी, चित्तौडगढ़़ सहित राज्य के सभी जिलों में कुल मौजूद चिकित्सालयों में अधिकतर की हालत खराब है। रखरखाव नहीं होने की वजह से ही अलवर जिले के तालाब क्षेत्र का पशु चिकित्सालय गत माह भरभराकर कर बरसात के दौरान गिर गया था। इनमें से कई जिलों की जमीनी पड़ताल की गई तो हालात और भी ज्यादा चौंकानेवाले मिले। सीकर के कुल 164 आयुर्वेदिक हॉस्पिटलों में से 80 के भवनों की हालत खराब हो चुकी है। हालात यह हैं कि इनमें से कई में केवल दरारें आ चुकी हैं, बल्कि बरसात के दौरान इन्हीं दरारों में निकले पानी के कारण कई हॉस्पिटल तालाब में बदल गए थे। यही हालत बांसवाड़ा, झुंझनू, भीलवाड़ा, चुरू और हनुमानगढ़ की भी मिली।
प्रदेश में जिलावार आयुर्वेदिक चिकित्सालयों की संख्या पर एक नजर
जिला संख्या जीर्ण-शीर्ण
अजमेर 138 90
अलवर 185 70
बांसवाड़ा 115 65
बारां 63 40
बाड़मेर 97 35
भरतपुर 138 91
भीलवाड़ा 189 73
बीकानेर 108 55
बूंदी 64 30
चित्तौडगढ़़ 102 46
चुरू 117 52
दौसा 101 39
धौलपुर 55 27
डूंगरपुर 121 58
श्रीगंगानगर 87 34
हनुमानगढ़ 97 36
जयपुर 306 112
जैसलमेर 35 11
जालोर 71 33
झालावाड़ 82 37
झुंझनू 159 65
जोधपुर 125 44
करौली 79 38
कोटा 60 28
नागौर 161 71
पाली 143 75
प्रतापगढ़ 51 25
राजसमंद 96 32
सवाईमाधोपुर 88 26
सीकर 164 67
सिरोही 66 21
टोंक 104 41
उदयपुर 184 69
मरम्मत या रखरखाव का कोई बजट नहीं आता
आयुर्वेदिक विभाग के अनुसार हॉस्पिटलों के लिए अलग से रखरखाव एवं बजट का कोई प्रावधान ही नहीं किया गया है। इसके चलते कभी कोई बजट ही नहीं आता है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के सभी जिलों के उपनिदेशकों की ओर से भवन की मरम्मत कराए जाने के लिए बजट मांगा जाता है। ज्यादातर जिलों से दर्जनों बार इस संबंध में निदेशालय से पत्राचार किया चुका है। इसके बाद भी इसके लिए आज तक कोई बजट नहीं आया।
इनका कहना है…
संबंधित जिलों से इस प्रकार की सूचना आने पर जांच तो कराई जाती है, लेकिन फिलहाल विभाग की ओर से ऐसे पशु हास्टिपलों की जांच कराई जा रही है। जांच में जीर्ण-शीर्ण मिलने वाले हॉस्पिटलों की मरम्मत प्राथमिकता से कराई जाएगी।
आनन्द शर्मा, निदेशक, आयुर्वेदि निदेशालय अजमेर
राज्य के 60 प्रतिशत से ज्यादा आयुर्वेदिक हॉस्पिटलों के भवनों की हालत खराब है। विभाग की ओर से मरम्मत के लिए अलग से कोई बजट नहीं आता है। इसकी वजह से विभाग के चिकित्सा कर्मी खुद को खतरे में डालते हुए काम करने के लिए मजबूर हैं।
डॉ. सुरेश रॉयल, प्रांतीय पी. जी. प्रतिनिधि, राजस्थान आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी संघ