
नागौर. सात माह पूर्व अनियमिततता के चलते बंद हुई अन्नपूर्णा रसोई आज तक संचालित नहीं हो पाई। इस रसोई का जिला हॉस्पिटल एवं रोडवेज के साथ गांधी चौक सरीखी महत्वपूर्ण जगहों पर इनका संचालन बंद होने के कारण परेशानी बढ़ गई है। हॉस्पिटल में जहां नागौर एवं आसपास सुदूर क्षेत्रों से ग्रामीण इलाज के लिए आते हैं तो रोडवेज में प्रतिदिन दस हजार से ज्यादा की संख्या में यात्री सफर करते हैं। इनमें शामिल जरूरतमंदों को अब भोजन नहीं मिलने से परेशानी बढ़ी है।
गड़बड़ी मिलने पर कर दी गई थी बंद
मिली जानकारी के अनुसार रसोई का संचालन लक्ष्मीतारा के सामने हनुमानबाग कॉलोनी, रेाडवेज बस स्टैंड, पुराना बस स्टैंड, तहसील चौक-गांधी चौक, सामुदायिक भवन कुम्हारी दरवाजा, आश्रयस्थल नकास गेट, शिक्षा विभाग के सामने बीकानेर रोड, जेएलएन हॉस्पिटल एवं कृषि मंडी परिसर में किया जा रहा था। विगत वर्ष 2023 के नवंबर माह में इनमें से कृषि मंडी को छोडकऱ शेष अन्नपूर्णा रसोइयों की जांच में भोजन वितरण में गड़बड़ी पकड़ी गई थी। इसके बाद तत्कालीन आयुक्त रहे देवीलाल बोचल्लया ने इसकी जांच कर रिपोर्ट डीएलबी भेजी थी। इसके बाद डीएलबी से मिले दिशा-निर्देश के अनुसार मंडी में संचालित रसोई के अतिरिक्त अन्य आठ अन्नपूर्णा रसोई का संचालन करने वाली संस्थाओं को ब्लैकलिस्टेड कर बंद करा दिया गया था। इसके बाद से अब तक रसोई का संचालन बंद चल रहा है।
पहले सस्ता भेाजन मिलता थ, अब भटक रहे हैं
अन्नपूर्णा रसोई संचालन बंद होने की स्थिति में जरूरतमंदों के स्थिति की पड़ताल की गई तो सभी परेशान नजर आए। रोडवेज बस स्टैंड, केन्द्रीय बस स्टैंड, राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं लक्ष्मीतारा सिनेमा के निकट और गांधी चौक क्षेत्र में बंद होने का खासा असर पड़ा है। इसमें सुबह करीब दस बजे जेएलएन हॉस्पिटल पहुंचे तो यहां पर हॉस्पिटल में सफाई करने वाले सफाई कर्मियों से बात हुई तो इनका गुस्सा फूट पड़ा। सफाई कर्मियों का कहना था कि वह यहां पर रोजाना सफाई करने के बाद अन्नपूर्णा रसोई में जाकर भोजन करते थे। अब यह काफी समय से बंद है। आसपास कोई इतना सस्ता ढाबा आदि भी नहीं है। इसकी वजह से उनको खासी परेशानी हो रही है। रोडवेज बस स्टैंड पर पहुंचे तो यहां सुलभ कॉम्प्लेक्स के पास बैठे चार लोग मिले। इनमें राजूराम, मोहित, सुमेर ने बताया कि भाईसाब हम लोग तो फेरी लगाकर सामान बेचते हैं। यहां पर बेहद सस्ता भोजन मिल जाता था। अब काफी समय से रसोई ही बंद है। इसी तरह की स्थिति लक्ष्मीताराम और गांधी चौक क्षेत्र में मिली। यहां पर भियालाल, अनिल, मनीष एवं सुरेन्द्र ने कहा कि गड़बड़ी किसी ने भी की हो, लेकिन उसकी सजा इसे बंद कर हमें क्यो दी जा रही है।
बेहद मुश्किल हो रही है…
हम पंद्रह से बीस लोग हैं। रोजाना जिला हॉस्पिटल में सफाई करने के लिए आते हैं। ज्यादातर गांव के ही हैं। पहले इंदिरा रसोई से सस्ते पैसे में भोजन मिल जाता था। अब बंद होने के कारण हम लोगों को परेशानी हो रही है। गलती किसी ने की हो, लेकिन उसकी सजा तो हमें दी जा रही है।
बुद्धाराम, पीडि़त जरूरतमंद
सस्ते पैसे में मिलता है भरपूर भोजन
मरे पिता हॉस्पिटल में भर्ती हैं। पहले भी हॉस्पिटल आता रहा हूं तो यहां पर काफी सस्ती दर पर खाना मिल जाता था। पिछले कुछ समय से चार से पांच बार आ चुका हूं, और यह रसोई हर बार बंद मिलती है। आसपास खाने का अन्य कोई स्थान भी नहीं है। आखिर खाना खाने, हम जैसे लोग कहां जाएं।
सुरेश, पीडि़त, रोगी परिजन
आठ रुपए में मिलता है भोजन
श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना’ में भोजन के हिस्से के आकार को बढ़ाकर 600 ग्राम प्रति प्लेट करना शामिल है। प्रति भोजन सरकारी अनुदान 17 से बढ़ाकर 22 कर दिया गया है। इसमें रोटी, दाल चावल एवं अचार मिलाकर भोजन की थाली परोसी जाती है। बंद रसोई चले तो फिर से जरूररतमंदों को इसकी सुविधा मिलने लगे।
इनका कहना है…
बंद रसोइयों का संचालन जल्द ही शुरू कराया जाएगा। इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
रमेश रिणवा, आयुक्त नगरपरिषद नागौर
नागौर. जेएलएन हॉस्पिटल में बंद रसोई