
नागौर. जिले में करीब तीन दर्जन आंगनबाड़ी केन्द्रों में कार्यकर्ता ही नहीं हैं। इनका सहायिकाओं को वहन करना पड़ रहा है। इसके चलते केन्द्रों में टीकाकरण, कुपोषण एवं बच्चों को कृमि से मुक्त करने सरीखे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना कि निकटवर्ती केन्द्रों के कार्यकर्ताओं के मार्फत खाली पदों वाले आंगनबाड़ी केन्द्रों में कराए जा रहे हैं, लेकिन विभागी जानकारों का कहना है कि खाली पदों की वजह से स्थिति विकट होने लगी है।
जिले के करीब तीन दर्जन आंगनबाड़ी केन्द्रों की गतिविधियां भगवान भरोसे चल रही है। कारण पिछले लंबे समय से कार्यकर्ताओं की नियुक्तियां ही आंगनबाड़ी केन्द्रों में नहीं की गई है। इसकी वजह से बच्चों की देखभाल से लेकर पढ़ाई तक के यानि की बच्चों को स्कूल पूर्व शिक्षा देने आदि के काम कागजों में तो चल रहे हैं, लेकिन हकीकतन सच्चाई कुछ और ही है। विभागीय जानकारों की माने तो खाली पदों वाले केन्द्रों की गतिविधियां सुचारु रूप से संचालित करना मुश्किल होने लगा है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के यह होते हैं काम
बच्चों का वजऩ रिकॉर्ड करना, बच्चों का टीकाकरण कराना, बच्चों को कुपोषण से बचाना, बच्चों को दस्त का इलाज देना, बच्चों को कृमि मुक्ति कराना, बच्चों को साधारण दवाएं देना, गर्भवती महिलाओं की जन्मपूर्व और प्रसवपूर्व देखभाल करना, नवजात शिशुओं और नर्सिंग माताओं की देखभाल करना, गर्भवती और नर्सिंग महिलाओं की निगरानी करना, बच्चों को पूरक पोषण देना एवं बच्चों को पूर्व-स्कूल शिक्षा देना।
कुल 35 कार्यकर्ताओं के पद खाली
आईसीडीएस की ओर से संचालित खाली पदों वाले ब्लॉक क्षेत्रों में डेगाना, जायल, नागौर, खींवसर, मेड़तासिटी, मूण्डवा, रियाबड़ी आदि क्षेत्र शामिल हैं। विभाग से मिले अधिकृत आंकड़े के अनुसार इनमें कुल 35 आंगनबाड़ी केन्द्रों में कार्यकर्ता नहीं हैं।
इनका कहना है…
कार्यकर्ताओं के खाली पद वाले आंगनबाड़ी केन्द्रों में निकटवर्ती केन्द्रों की कार्यकर्ताओं के मार्फत कराए जा रहे हैं। केन्द्रों के संचालन के लिए हरसंभव आवश्यक कदम उठाए गए हैं। जल्द ही इनकी भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कराई जाएगी।
दुर्गा सिंह उदावत, उपनिदेशक, आईसीडीएस नागौर