नागौर. सब्जियों भावों में हुई बढ़ोत्तरी से अब मंहगाई आसमान छूने लगी है। सब्जी मंडी में मिलने वाली सब्जियों की दरों से भी पांच से सात गुना ज्यादा के दाम पर खुले बाजार में सब्जियां बेजी जा रही हैं। इनके भावों पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं है। मनमर्जी से सब्जियों को मंहगी दरों पर बेचा जा रहा है। स्थिति यह हो गई है कि दुकानों पर लहसुन जहां 400 रुपए प्रति किलो की दर से मिल रहा है तो छह से आठ रुपए प्रति किलो मंडी में मिली लौकी को भी 40-50 रुपए प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है।
400 रुपए किलो बिक रहा लहसुन
सब्जियों की मंहगाई ने लोगों की कमर तोडकऱ रख दी है। लगातार मंहगी होती सब्जियों की वजह से रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। स्थिति यह हो गई है कि जरूरी सब्जियों में आलू, टमाटर, भिंडी एवं प्याज की ही केवल खरीद की जाए तो जेब पर करीब एक हजार रुपए का भार पड़ जाता है। यही स्थिति लौकी, तोरू, टिंडसी, हरी प्याज, करेला, काचरा एवं हरी धनिया की है। लहसुन तो इस समय पूरी सब्जियों पर भारी पड़ रहा है। 400 रुपए में लहसुन खरीदेंगे, इतनी में दो से तीन सब्जियां मिलकर आ जाती हैं। यही स्थिति हरी धनिया की है। बाजार में यह 200 रुपए से 250 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रही है। सब्जियों की मंहगाई की वजह से अब दुकानों पर सजी सब्जियां भी डराने लगी हैं।
केवल एक प्रतिशत कल्याण शुल्क व छह प्रतिशत आढ़त
इस संबंध में हुई पड़ताल में सामने आया कि सब्जी मंडी में किसान सब्जी लेकर आता है तो उस पर सरकारी स्तर पर केवल एक प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क लगता है। यह शुल्क वर्ष 2020 से ही लग रहा है। इस पर व्यापारियों की ओर से आढ़त भी केवल 6 प्रतिशत ही लगाई जाती है। इसको ऐसे समझा जा सकता है कि मंडी में छह से आठ रुपए प्रति किलो की लौकी मंगलवार को बिकी, लेकिन दुकानों पर यह 40-50 रुपए प्रति किलो की दर से ग्राहकों को दी जा रही है। यानि की कृषक कल्याण शुल्क, आढ़त एवं परिवहन व्यय आदि मिलाकर भी सब्जियों भाव 10-12 रुपए किलो की दर पर ही पहुंच पाते हैं। इस दर में भी लौकी बेचे जाने पर सब्जी विक्रेता को डेढ़ गुना ज्यादा मुनाफा मिल रहा है, लेकिन यहां तो व्यापार पूरे मापदंडों को तार-तार करते हुए मनमर्जी से चालीस से पचास रुपए में बेचा रहा है। कुल मिलाकर फायदा केवल खुले बाजार के दुकानदारों को ही मिल रहा है, और उपभोक्ता एवं किसान दोनो ही छले जा रहे हैं।
हमें तो पूरा दाम वसूलना पड़ता है
इस संबंध में गांधी चौक एवं दिल्ली दरवाजा क्षेत्र के दुकानदार रमेश, जुगल व जुम्मन ने बातचीत में बताया कि मंडी से थोक भाव में आने वाले सब्जियों में से कुछ सब्जियां खराब निकल जाती हैं। इसके अलावा वहां चार या पांच किलो नहीं, बल्कि पूरी खेप लेनी पड़ती है। कभी-कभी सारी सब्जियां बिक नहीं पाती है। ऐसे में सभी का मिलाकर खर्चा निकालना पड़ता है। सब्जियां आप गांधी चौक में लीजिये या फिर दिल्ली दरवाजा में, इनके भावों में कोई विशेष अंतर नहीं होता।
सब्जी मंडी भाव बाजार भाव
आलू 20 30-35
टमाटर 25-30 50-60
भिंडी 10-15 50-60
करेला 30 40-50
मिर्ची 25-30 60
लौकी 6-8 40-50
प्याज 30-40 50-60
तोरू 20 60
टिंडसी 15-20 40-50
हरी प्याज30 60
लहसुन 280 400
इनका कहना है…
सब्जी मंडी में मंडी प्रशासन के अनुसार सब्जियों के व्यापार के लिए माकूल व्यवस्था की गई है। किसानों से केवल कृषक कल्याण कोष के तौर पर एक प्रतिशत का शुल्क लिया जाता है। खुले बाजार की सब्जियों के भाव पर मंडी प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं रहता है।
– रघुनाथराम सिंवर, सचिव, कृषि उपजमंडी सचिव
सब्जीमंडी में सब्जी आती है तो यहां पर निर्धारित प्रावधानों के तहत ही व्यापार किया जाता है। काश्तकारों को उचित मूल्य दिलाने का प्रयास सदैव रहता है। दुकानों में बिक रही सब्जियों के बारे में कुछ कह नहीं सकता हूं। सभी को अपनी लागत निकालकर ही सामान बेचना पड़ता है।
– रामकुमार भाटी, अध्यक्ष, सब्जी मंडी यूनियन