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VIDEO…नदी भरी होने के चलते खेतो व आसपास के क्षेत्रो मे घुसकर कर रहे अवैध खनन
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VIDEO…नदी भरी होने के चलते खेतो व आसपास के क्षेत्रो मे घुसकर कर रहे अवैध खनन

नागौर. जिले में अवैध खनन करने वाले बेखौंफ अवैध रूप से बजरी खनन करने में लगे हुए हैं। लूणी नदी भरी होने के चलते इसके आसपास के खेतों में घुसकर अवैध खनन किया जा रहा है। इतना ही नहीं, बल्कि अवैध खनन करने वालों ने मनमर्जी से खनन कार्य के लिए अपने-अपने इलाके भी बांट […]

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नागौर. जिले में अवैध खनन करने वाले बेखौंफ अवैध रूप से बजरी खनन करने में लगे हुए हैं। लूणी नदी भरी होने के चलते इसके आसपास के खेतों में घुसकर अवैध खनन किया जा रहा है। इतना ही नहीं, बल्कि अवैध खनन करने वालों ने मनमर्जी से खनन कार्य के लिए अपने-अपने इलाके भी बांट लिए हैं। इसकी वजह से जहां आए दिन परस्पर संघर्ष की स्थिति बन जाती है। वहीं इसको लेकर अब मारपीट की घटनाएं भी तेजी से बढऩे लगी हैं। माना जा रहा है कि प्रशासन ने अवैध खनन कर्ताओं के खिलाफ लगाम लगाने में ढिलाई की तो फिर यहां पर गैंगवार की घटनाएं भी हो सकती हैं। इस तरह की आशकाओं को लेकर चर्चाओं का बाजार भी गर्म है।
बेखौंफ बजरी लदे निकलते वाहन
जिले में लूणी नदी क्षेत्र में खनन की लीज तो छह माह पहले ही समाप्त हो गई, लेकिन इलाके में बजरी खनन का काम बंद होने की बजाय और ज्यादा बढ़ गया है। गोटन, रियाबड़ी, मेड़ता, पादूकला, जसनगर, झीटिया, आलनियावास, कीरो की ढाणी, थांवला एवं जसनगर आदि क्षेत्रों में कई जगहों पर एकत्रित बजरी के स्टॉक एवं बजरी लदी गाडिय़ों को गुजरते हुए कभी भी देखा जा सकता है। इस संबंध में हुई पड़ताल में सामने आया कि लूणी नदी तो पूरी तरह भरी हुई है, लेकिन अब इसके आसपास के इलाके अवैध खननकर्ताओं की भेंट चढऩे लगे हैं। अवैध खनन करने वाले खेतों एवं नदी के नजदीक वाले ज्यादातर क्षेत्रों को अब अपना निशाना बनाने में लगे हुए हैं। इसके अब भी क्षेत्रों से तीन सौ से चार सौ गाडिय़ां बजरी लेकर गंतव्यों को रवाना हो रही हैं।
परस्पर संघर्ष की घटनाएं बढऩे लगी
जानकारों की माने तो अवैध खनन करने वालों ने अपनी मनमर्जी से इलाकों का बंटवारा करना शुरू कर दिया है। अघोषित एवं सांकेतिक रूप से एक पत्थर पर चिह्न लगाकर खनन के अपने-अपने इलाके बनाए जा रहे हैं। इसकेा लेकर हाल ही में जसनगर क्षेत्र में संघर्ष की घटनाएं भी हुई थी। इसके अलावा करीब एक साल पहले बजरे लदे वाहन की चपेट में आकर एक युवक की भी कुचलकर मौत हो गई थी। माना रहा है कि यह मौत भी इलाके के परस्पर बंटवारे एवं वर्चस्व के संघर्ष का परिणाम थी। इलाके के बाशिंदों की माने तो अवैध खनन एरिया में आंशिक रूप से मारपीट की घटनाएं तो प्रतिदिन हो रही है, लेकिन यदि जिम्मेदारों ने इस पर लगाम नहीं लगाई तो फिर किसी दिन यह बड़े संघर्ष का रूप ले लेगी। ऐसा होने पर फिर स्थिति बेहद खराब हो जाएगी। आलनियावास के रामूराम (बदला हुआ नाम) ने बताया कि मेड़ता, आलनियावास, झीटिया एवं कीरो की ढाणी आदि क्षेत्र के मुख्य मार्गों से जुड़े बाजारों पर से प्रतिदिन बजरी लदे वाहनों के साथ इनके बीच छिटपुट रूप से हुए संघर्ष को देखा जा सकता है।
इनका कहना है…
अवैध खनन के खिलाफ विभाग की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। उच्चाधिकारियों से भी कार्रवाई करने के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं। रात्रि में भी गश्त लगाकर जांच की जा रही है।
राकेश शेषमा, खनि अभियंता, गोटन, खनिज विभाग