
नागौर. जर्जर होने के साथ ही हुए गड्ढों की वजह से हड्डियों के बीमार बढ़ रहे हैं। इसकी वजह से स्लिप डिस्क, गर्दन में खिंचाव, नर्वस सिस्टम का डिस्टर्ब होने सरीखे घातक रोगों से सभी वर्गों के लोग ग्रसित हो रहे हैं। इसमें बुजुर्गों से लेकर 16 साल तक के किशोर भी शामिल हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों की माने तो पिछले कुछ सालों में इसके रोगियों की संख्या में खासी बढ़ोत्तरी होने लगी है। स्थिति यह है कि राजकीय चिकित्सालय में प्रतिदिन सौ से डेढ़ सौ लोग केवल हड्डियों से जुड़ी बीमारियों से ग्रसित होने वाले पहुंच रहे हैं। जबकि महज चार से पांच साल पहले ऐसे रोगियों की संख्या गिनतियों में होती थी।
नया दरवाजा……बख्तासागर तालाब रोड
नया दरवाजा से बख्तासागर तालाब मार्ग ी ओर जाने वाली गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। यहां से सूफी साहब की दरगाह, तेलीवाड़ा, लोहारपुरा व तोपचौक की ओर जाने वाले मार्ग पर दर्जनों की संख्या में गड्ढे हो चुके हैं। यहां से सफर करने के दौरान वाहन उछलते हुए चलते हैं। विशेषकर बाइक सवारों की हालत ज्यादा खराब रहती है।
नया दरवाजा……बंशीवाला मंदिर मार्ग
इस पूरे रास्ते पर हर पांच मीटर में बाइक को रोकनी पड़ती है। इस पूरे रास्ते की हालत खराब है। यहां से बंशीवाला मंदिर के साथ ही काजियों का चौक, बाजरवाड़ा, गांधी चौक एवं सदर बाजार की ओर रास्ता जाता है। इसमें सडक़ का एक भी हिस्सा सुरक्षित नहीं है। सभी में गड्ढे हो चुके हैं।
शिवबाड़ी….कुम्हारी दरवाजा
शिवबाड़ी से कुम्हारी दरवाजा जाने वाला मार्ग भी शहर के प्रमुखतम व्यस्ततम मार्गों में शामिल है। यहां पर ट्रेफिक का बहुत ज्यादा दबाव रहता है। इस पूरे रास्ते पर वाहन हिचकोले खाते हुए चलते हैं। कुछ जगहों पर तो गड्ढे इतने गहरे हैं कि गलती वाहनों का पहिया जाने पर पूरी गाड़ी ही पलट जाती है। विशेषकर मोटरसाइकिल चलाने वालों की तो हालत खराब रहती है।
इन मार्गों की हालत भी बेहद खराब
शहर के सुगन सिंह सर्किल, लोहिया का चौक, काठडिय़ा का चौक, इंदिरा कॉलोनी, व्यास कॉलोनी, मिश्रावाड़ी, रामपोल, प्राइवेट बस स्टैंड, गांधी चौक, ए रोड, बी रोड एवं दिल्ली दरवाजा आदि क्षेत्रों में तो सडक़ें ही गायब हो चुकी हैं। इन रास्तों पर भी सफर करना मुश्किल हो चुका है।
पैदल चलना मुश्किल हो गया है
शहर की सडक़ों पर तो गड्ढों के कारण चलना ही मुश्किल हो गया है। पैदल चलने तक में मुश्किल हो रही है। इसकी वजह से कभी कमर में दर्द तो कई बार गर्दन में खिंचाव आ जाता है।
रेखाराम जाखड़, बुजुर्ग
बाइक चलाने पर झटका लगता है। ऐसे झटकों की वजह से बैकबोन में दर्द रहता है। कुछ दिन पहले ही ऐसे ही सडक़ पर गड्ढों के कारण गिर पड़ा था। इससे कई दिनों तक कमर दर्द से परेशान रहा।
मदनलाल गोस्वामी, बुजुर्ग
क्या कहते हैं एक्सपट………..
राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय के आर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. हितेश चौधरी बताते हैं कि पहले केवल 15 से 20 मरीज स्पाइन की समस्या लेकर आते थे, लेकिन अब 100 से ज्यादा मरीज रोजाना आ रहे हैं। इसमें अधिकांश वैसे लोग हैं, जो नियमित कार्यालय जाते हैं, बाइक चलाने वाले हैं। उनमें यह परेशानी सबसे ज्यादा पाई जा रही है। गड्ढे और स्पीड ब्रेकर पार करने पर झटके के कारण इसका प्रेशर गर्दन पर पड़ता है। कमर की हड्डी भी इससे प्रभावित होती है। अस्पताल में शिकायत लेकर आने वाले में सबसे ज्यादा 25 से 60 वर्ष के लोग होते हैं। अस्पताल में स्लिप डिस्क से पीडि़त महिला रोगी भी खूब आने लगी है। बुजुर्गों को भी यह समस्या रहती है।
इसका रखेें ध्यान
डॉ. चौधरी बताते हैं कि बाइक व दोपहिया चलाने में सावधानी न बरतने और बैठने का तरीका गलत होने पर गर्दन, कमर व पीठ में दर्द की समस्या हो जाती है। सडक़ों पर गड्ढे होने और जलभराव की वजह से लोग वाहनों को आड़ा तिरछा कर चलाते हैं। इससे झटके लगते हैं और मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है। यही वजह है कि लोगों को समस्याएं होती हैं। वहीं कुछ लोग गलत तरीके से लेटने और ऊंची तकिया लगाने पर भी इस तरह की समस्या का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में सावधानी ही एकमात्र इलाज है।