17 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नागौर
VIDEO…बैर की गांठ खुलने पर ही अमित शांति की प्राप्ति हो सकती है
Play video

VIDEO…बैर की गांठ खुलने पर ही अमित शांति की प्राप्ति हो सकती है

नागौर. श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में रविवार को संवत्सरी महापर्व मनाया गया। जयमल जैन पौषधशाला में प्रवचन करते हुए साध्वी बिंदुप्रभा ने कहा कि संवत्सरी महापर्व क्षमा की अमृतधारा से ह्रदय की कलुषता धोने वाला एवं आत्म ज्ञान की ज्योति प्रकट करने वाला पावन पर्व है। इस पर्व की उपासना एवं […]

Google source verification

नागौर. श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में रविवार को संवत्सरी महापर्व मनाया गया। जयमल जैन पौषधशाला में प्रवचन करते हुए साध्वी बिंदुप्रभा ने कहा कि संवत्सरी महापर्व क्षमा की अमृतधारा से ह्रदय की कलुषता धोने वाला एवं आत्म ज्ञान की ज्योति प्रकट करने वाला पावन पर्व है। इस पर्व की उपासना एवं आराधना का मूल उद्देश्य राग-द्वेष की शांति करते हुए जनमानस में सरलता, विनय, मैत्री भाव आदि मानवीय गुणों को प्रकट करना है। इस दिन प्रत्येक आत्म साधक अपने वर्ष भर के जीवन व्यवहार का मूल्यांकन करता है। अपने द्वारा जाने-अनजाने में हुए दुष्कृत एवं पापों की शुद्ध मन से आलोचना करता है। तथा भविष्य में उसकी पुनरावृत्ति ना हो उसके लिए संकल्पित होता है। यह पर्व प्राणी मात्र के प्रति आत्म तुल्य भाव जागृत करता है। साध्वी ने कहा कि संवत्सरी के दिन बैर की गांठ को दूर कर क्षमा का गुण प्रकट करना चाहिए। हर जीव को आत्म अवलोकन करना चाहिए कि कहीं किसी के साथ मनमुटाव या बैर तो नहीं है। बैर की गांठ खुलने पर ही अमित शांति की प्राप्ति हो सकती है। क्षमा मांगने से व्यक्ति छोटा नहीं अपितु महान बनता है। क्षमा के द्वारा शत्रु को भी मित्र बनाया जा सकता है। क्रोध प्रीति का नाश करने वाला होता है। जबकि क्षमा से मैत्री का संचार होता है। दोपहर को सुशील धरम आराधना भवन में कल्प सूत्र वाचन, बृहद आलोयना, धार्मिक अध्ययन हुआ। सूर्यास्त पश्चात प्रतिक्रमण किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपवास की तपस्या की। इसके साथ ही पौषध व्रत व संवर भी किया गया। इस दौरान लगातार आठ दिनों से चल रहे नवकार मंत्र का जाप भी रविवार को पूर्ण हुआ। इसमें शामिल गणपतमल, नवीन कुमार, बंसत ललवानी प्रभावना दी जाएगी। संचालन संजय पींचा ने किया।
नौ व आठ उपवास के हुए प्रत्याख्यान
विकास बोथरा ने नौ उपवास, कविता चौरडिय़ा ने आठ उपवास, अंकित चौरडिय़ा ने पांच उपवास, वीणा देवी बोहरा ने चार उपवास, अमित नाहटा, महेश गुरा, शुभम नाहटा, संयम ललवानी, शांतिलाल छाजेड़ ने तीन उपवास की तपस्या के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। संघ की ओर से इनका बहुमान किया गया। प्रवचन की प्रभावना का लाभ कंवलमल राजा ललवानी परिवार मुंबई, कमलचंद संजय कुमार पींचा परिवार, नरपतचंद भरत चौरडिय़ा परिवार, नेमीचंद नरेश कुमार चौरडिय़ां, प्रश्नोत्तरी विजेताओं को पुरस्कृत करने का लाभ नरपतचंद, भरत चौरडिय़ा को मिला। रविवारीय प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत करने का लाभ श्रेणीक राज सिंघवी को मिला। चातुर्मास के मुख्य लाभार्थी बनने का सौभाग्य चंपालाल, विजयसिंह पींचा को मिला। चातुर्मास काल में दैनिक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत करने का मुख्य लाभ चंचलकंवर, हस्तीमल बाघमार को मिला। काफी लोगों ने किया। संचालन संजय पींचा ने किया।
सामूहिक क्षमापना आज
सोमवार सुबह नेमीचंद, नरेंद्र कुमार, नवनीत, नितेश चौरडिय़ा की ओर से गांधीवाड़ी स्थित निवास स्थान पर सामूहिक पारणा का आयोजन होगा। जयेश पींचा ने बताया कि सुशील धरम आराधना भवन में सुबह 9 बजे से सामूहिक क्षमापना का कार्यक्रम होगा। तत्पश्चात संघ की मौजूदगी में नवकार महामंत्र का पाट लाभार्थी नेमीचंद, नरेंद्र कुमार चौरडिय़ा परिवार के गांधीवाड़ी स्थित निवास स्थान पर ले जाया जाएगा। इस दौरान महावीरचंद भूरट, हरकचंद ललवानी, ललित सुराणा, नरपतचंद ललवानी, कमलचंद चौरडिय़ा, कमलचंद ललवानी, गिरधारी चौरडिय़ा, दशरथचंद लोढ़ा, पूनमचंद बैद, सुभाष ललवानी, किशोरचंद पारख, सुरेशचंद भूरट, परमेश गुरा, धनराज सुराणा, पार्षद दीपक सैनी, प्रेमचंद तंवर, ज्ञानचंद माली, लूणकरण बेताला, राजू नाहटा, मूलचंद ललवानी, हीराचंद सेठिया, मनोज ललवानी, मुकेश ललवानी, ललित मुणोत आदि श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे।