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VIDEO…आयुर्वेद निदेशालय से आया फरमान, राज्य के डेढ़ हजार से ज्यादा आयुर्वेदिक चिकित्सालयों का होगा निर्माण
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VIDEO…आयुर्वेद निदेशालय से आया फरमान, राज्य के डेढ़ हजार से ज्यादा आयुर्वेदिक चिकित्सालयों का होगा निर्माण

नागौर. प्रदेश के जिलों में आयुर्वेद विभाग के चिकित्सक एवं कार्मिकों के लिए खुशखबरी है। आयुर्वेद विभाग के निदेशालय की ओर से राज्य के सभी जिलों में जर्जर, गिरे, और न बैठने योग्य हॉस्पिटलों का कायाकल्प किया जाएगा। आयुर्वेद विभाग के निदेशक की ओर से राज्य के उपनिदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने-अपने जिले के खराब हो चुके और खराब हो रहे भवनों की रिपोर्ट के साथ तकमीना बनाकर प्रस्ताव भेजें। ताकि उनको बनवाया जा सके। निदेशक ने यह भी चेताया कि इस काम को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाना चाहिए। इसमें लापरवाही बिलकुल नहीं होनी चाहिए।
जागा आयुर्वेद विभाग, हरकत में आया
निदेशालय की ओर से आयुर्वेद हॉस्पिटलों को नए सिरे से बनवाए जाने की कवायद शुरू कर दी गई है। निदेशालय के इस निर्देश से राज्य के सभी आयुर्वेदिक हॉस्पिटलों के चिकित्सकों एवं कर्मियों ने राहत की सांस ली है। बताते हैं कि आयुर्वेद विभाग ने पहली बार इस तरह के निर्देश जारी किए हैं। जिसमें प्राथमिकता के आधार पर ऐसे भवनों की सूची के साथ ही तकमीना बनाकर भेजने के लिए कहा गया है।
उठाया था मुद्दा
राजस्थान पत्रिका की ओर से राज्य के आधा दर्जन जिलों की पड़ताल के बाद आयुर्वेद विभाग के जर्जर हॉस्पिटलों की हालत, और दरारों से गिरते बरसात के पानी की स्थिति देखकर इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार की गई। इसके पश्चात इस संबंध में राज्य के विभिन्न जिलों के चिकित्सकों से बातचीत कर उनकी स्थिति समझने के बाद इस मुद्दे को प्रदेश में डेढ़ हजार से ज्यादा आयुर्वेदिक चिकित्सालय कही न हो जाएं जमींदोज शीर्षक से प्रकाशित खबर में प्रमुखता से उठाया गया। इसके बाद हरकत में आए आयुर्वेद विभाग के निदेशालय के निदेशक डॉ. आनन्द कुमार शर्मा की ओर से राज्य के सभी जिलों के उपनिदेशकों को निर्देश जारी किए गए।
निदेशालय की ओर से यह जारी हुआ निर्देश
निदेशालय के निदेशक डॉ. आनन्द कुमार शर्मा की ओर से निर्देश में उपनिदेशकों को कहा गया है कि अपने क्षेत्र के ऐसे चिकित्सालय व औषधालय के भवनों की सूची तकमीना सहित प्रस्ताव बनाकर भेजें। जो अत्याधिक वर्षा के कारण गिर चुके हैं। इसके साथ ही ऐसे भवन जो बैठने योग्य न रह गए हों, की सूची भी तकमीना बनाकर नकारा होने के प्रमाणपत्र सहित बनाकर तत्काल भेजें। इस कार्य को पहली प्राथमिकता में लेने की नसीहत भी दी गई है।
इनका कहना है…
राज्य के उपनिदेशकों को निर्देशित कर दिया गया है कि वह जर्जर भवनों के साथ ही गिरे हुए भवनों की सूची तकमीना बनाकर नकारा के प्रमाणपत्रों के साथ भेज दें। ताकि इनका नवीन निर्माण कराया जा सके।
डॉ. आनन्द कुमार शर्मा, निदेशक, आयुर्वेद निदेशालय अजमेर