26 जुलाई 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

राष्ट्रीय
आंखों में आंसू, दिल में सवाल.. उजड़ी दुनिया तो फूटी रूलाई.. रुला देगा वीडियो
Play video

आंखों में आंसू, दिल में सवाल.. उजड़ी दुनिया तो फूटी रूलाई.. रुला देगा वीडियो

लाल किले की दीवारें गवाह हैं कभी यहां तिरंगा लहराया था, आज हवा में बस एक दर्द तैर रहा है। दिल्ली रो रही है — उनके लिए जो लौटकर कभी नहीं आएंगे, और उन आंखों के लिए, जो अब भी इंतज़ार में हैं।
Google source verification

भारत

image

Darsh Sharma

Nov 11, 2025

रोती-बिलखती ये आवाज़… दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल के शव गृह के बाहर से है। जिन आंखों में कभी उम्मीद थी, आज उनमें बस आंसू हैं। जिन होंठों पर “पापा” कहने की आदत थी, वो अब एक सवाल पूछ रहे हैं — “कहां गए वो?” दर्द से करार रहे ये मासूम जानते हैं कि अब पिता का साया उठ चुका है। और अब उनके सिर पर बस यादों का बोझ और अनकही चीखें बाकी है। अस्पताल के बाहर ऐसे हालात है जैसे किसी ने वक्त को रोक दिया हो। चारों तरफ सन्नाटा है लेकिन उस सन्नाटे में आंसूओं की आवाज गूंज रही है। दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके ने सिर्फ नौ जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि नौ परिवारों की रूह को भी तोड़ दिया। अस्पताल के बाहर हज़ारों की भीड़ है, लेकिन हर चेहरा अकेला है। किसी के हाथ में रिपोर्ट है, किसी के हाथ में फोटो, और हर दिल में एक ही उम्मीद “शायद मेरा अपना ज़िंदा हो”

एम्बुलेंस के सायरन थम चुके हैं, लेकिन उस सन्नाटे में अब भी चीखें गूंज रही है। एक मां बेसुध होकर कहती है कि वो तो बस दफ्तर से घर लौट रहा था… अब कहां चला गया? पास खड़ा उसका भाई दीवार थामे खुद को संभालने की कोशिश कर रहा है, मगर आंखों से टपकते आंसू उसकी हालत बयान कर देते हैं। एलएनजेपी, आरएमएल और सफदरजंग अस्पतालों के इमरजेंसी वार्डों में अब भी घायल जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। अंदर डॉक्टर ज़िंदगियां बचाने की जंग लड़ रहे हैं, बाहर घायलों के परिजन ईश्वर से उनके अपनों को बचाने की अर्जी लगा रहे है

धमाके के बाद की ये दिल्ली अब सिर्फ एक शहर नहीं रही, बल्कि ये एक जख्म है जो हर मिनट रिस रहा है। पुलिस जांच कर रही है, एजेंसियां सुराग ढूंढ रही हैं, पर इस मातम में जो सवाल गूंज रहा है, उसका कोई जवाब नहीं। हर अस्पताल के बाहर अब भी वही नज़ारा है। किसी की गोद में तस्वीर, किसी के हाथ में अधजला फोन। हर आंख पूछ रही है — “क्या वो लौट आएगा?” लाल किले की दीवारें गवाह हैं कभी यहां तिरंगा लहराया था, आज हवा में बस एक दर्द तैर रहा है। दिल्ली रो रही है — उनके लिए जो लौटकर कभी नहीं आएंगे, और उन आंखों के लिए, जो अब भी इंतज़ार में हैं।


बड़ी खबरें

View All

राष्ट्रीय