
11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एक बड़ा आदेश जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर के सभी रिहायशी इलाकों से आठ हफ्तों में आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में भेजा जाए। कोर्ट का कहना है कि ये फैसला पब्लिक की सुरक्षा, देश में कुत्तों के काटने और बढ़ते रेबीज मामलों को रोकने के लिए लिया गया है। लेकिन जैसे ही कोर्ट का ये आदेश आया, आज 13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के बाहर जानवर प्रेमियों और कुछ वकीलों के बीच झगड़ा शुरू हो गया। पहले बहस हुई, फिर बात गाली-गलौच तक पहुंच गई और देखते ही देखते झगड़ा मारपीट में बदल गया। ये पूरा वाकया वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक वकील और कुछ अन्य लोग आपस में लड़ रहे हैं। वहां मौजूद कुछ लोग झगड़ा रोकने की कोशिश भी कर रहे हैं, लेकिन कोई किसी की सुन नहीं रहा था।
ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ विरोध भी तेज हो गया है। दिल्ली के इंडिया गेट पर बड़ी संख्या में एनिमल एक्टिविस्ट और कुत्तों से प्यार करने वाले लोग जमा हुए। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A(g) के तहत हर नागरिक का कर्तव्य है कि वो जानवरों के प्रति दया और पर्यावरण की रक्षा करे। इसी बात को आधार बनाकर सोशल मीडिया पर भी विरोध जताया गया।
इस फैसले को लेकर जानवरों के हक में काम करने वालीं और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी आलोचना की। उनका कहना है – दिल्ली में करीब तीन लाख आवारा कुत्ते हैं। अगर सभी को हटाना है, तो करीब 3,000 बड़े-बड़े शेल्टर बनाने पड़ेंगे, जिनमें पानी, ड्रेनेज, खाना, शेड और चौकीदार जैसी सुविधाएं हों। इसका खर्च करीब ₹15,000 करोड़ होगा। सवाल उठता है – क्या दिल्ली सरकार के पास इतना बजट है?
वहीं कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा कि नगर निगम और संबंधित विभाग तुरंत कुत्तों के लिए शेल्टर बनवाएं, प्रोफेशनल्स की टीम बनाएं जो कुत्तों को पकड़ सके, उनकी नसबंदी और टीकाकरण कर सके, साथ ही ये सुनिश्चित करें कि शेल्टर से कोई कुत्ता भाग न पाए – इसके लिए CCTV लगवाने के भी निर्देश दिए गए हैं। जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “ये फैसला किसी भावना के आधार पर नहीं, बल्कि जनता की भलाई के लिए लिया गया है। इसलिए किसी भी तरह की भावुकता या निजी राय को बीच में न लाया जाए। नियमों को अभी के लिए भुला दो और तुरंत एक्शन लो।”
बता दें कि अब ये पूरा मामला केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं रहा – ये इंसानों और जानवरों के बीच सामंजस्य, सुरक्षा और सह-अस्तित्व को लेकर एक बड़ी बहस बन चुका है। राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जन तक इसके विरोध में खड़ा हो गया है। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट अपना अगला निर्णय क्या लेता है।