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85 की उम्र और कैलाश व्यास को खबरों का जुनून

शक्करगढ़ के खैरुणा निवासी 85 वर्षीय कैलाश चंद्र व्यास इस बात की जीवंत मिसाल है कि सीखने की ललक उम्र की मोहताज नहीं होती। उनके लिए सुबह की चाय का स्वाद तब तक फीका रहता है, जब तक हाथ में राजस्थान पत्रिका ना आ जाए।

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शक्करगढ़ के (भीलवाड़ा)। खैरुणा निवासी 85 वर्षीय कैलाश चंद्र व्यास इस बात की जीवंत मिसाल है कि सीखने की ललक उम्र की मोहताज नहीं होती। पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए उन्हें 26 साल बीत चुके हैं, लेकिन उनकी दिनचर्या आज भी एक अनुशासित पुलिसकर्मी जैसी है। उनके लिए सुबह की चाय का स्वाद तब तक फीका रहता है, जब तक हाथ में राजस्थान पत्रिका ना आ जाए।

सेवानिवृत्ति के बाद इन ढाई दशकों में एक भी दिन ऐसा नहीं बीता, जब उन्होंने अखबार नहीं पढ़ा हो। कैलाश चंद्र व्यास के लिए अखबार केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि दुनिया से जुड़े रहने की खिड़की है। अखबार के प्रति उनका जुनून ऐसा है कि यदि कभी गांव में पत्रिका पहुंचने में देरी हो जाए, तो वे बेचैन हो उठते हैं। अपनी इस Òज्ञान की भूखÓ को शांत करने के लिए वे कई बार खुद 15 किलोमीटर दूर शक्करगढ़ जाकर अखबार लेकर आते हैं। सफेद मूंछों और पुलिसिया रौब वाले व्यास जी की पैनी नजरें आज भी खबरों की गहराई को बखूबी समझती हैं।

उनकी विशेषता यह है कि वे खबरों को सिर्फ अपने तक सीमित नहीं रखते। पुलिस सेवा के संस्कार आज भी उनकी जीवनशैली में झलकते हैं। वे मोहल्ले के सार्वजनिक स्थानों पर बैठकर अनपढ़ लोगों या व्यस्त ग्रामीणों को मुख्य समाचार पढ़कर सुनाते हैं।

कैलाश चंद्र व्यास बताते हैं कि 85 की उम्र में भी आंखों की रोशनी और तेज याददाश्त का राज नियमित पढ़ने की आदत ही है। परिजनों और परिचितों का कहना है कि चाहे मौसम खराब हो या घर में व्यस्तता, व्यास जी का अखबार प्रेम कभी कम नहीं होता। उनका यह समर्पण नई पीढ़ी के लिए एक संदेश है कि अनुशासन और ज्ञान के प्रति जिज्ञासा ही व्यक्ति को मानसिक रूप से सदैव युवा बनाए रखती है।