श्रावक और साधु एक गाड़ी के दो पहिये हैं। दोनों ही एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। जहां श्रावक का मुख्य धर्म दान ,पूजा और गुरु की उपासना करना है। वहीं साधु का धर्म ज्ञान, ध्यान और तप में लीन रहना है। यह बात आचार्य विरागसागर के शिष्य उपाध्याय मुनि विश्रुतसागर ने खंडवा में नगर प्रवेश के अवसर पर व्यक्त किए। इंदौर से धार, बड़वानी, बावनगजा, सिद्धक्षेत्र ऊन, खरगोन होते हुए मुनि संघ खंडवा पधारे। मुनि संघ को इंदौर रोड से मंगल प्रवेश शोभायात्रा के रूप में सराफा धर्मशाला लाया गया।
समाज के सचिव एवं मुनि सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन ने बताया कि मुनि संघ का खंडवा में आगमन चातुर्मास के लिए हुआ है। मुनि संघ में युवा मुनि निर्वेदसागर भी विराजमान हैं। शोभायात्रा में समाज के युवा मंडलों और ग्रुप के सदस्य जयकार और नारे लगाते हुए चल रहे थे। इस अवसर पर मुनि ससंघ के पाद प्रक्षालन का अवसर विजया बाई तोतालाल पहाडिय़ा परिवार ने एवं शास्त्र भेंट चिंतामन जैन ने प्राप्त किया। मुनि सेवा समिति के सक्रिय सदस्य एवं नगर गौरव बाल ब्रम्हचारी अर्पित भैयाजी का सम्मान भी किया गया। मंगलाचरण पायल जैन एवं योगिता जैन ने किया। मुनि सेवा समिति के अध्यक्ष विजय सेठी ने बताया कि 17 जुलाई को चातुर्मास की कलश स्थापना का कार्यक्रम होगा। सराफा बाजार स्थित जैन धर्मशाला में चातुर्मास के सभी कार्यक्रम होंगे।