
गुजरात विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान मैट्रिक के बाद आदिवासी छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) बंद करने के मुद्दे पर वेल में घुसे कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के चार आदिवासी विधायकों को सदन से निष्कासित कर दिया गया। इन चार विधायकों में कांग्रेस के तीन -आनंद पटेल, कांति खराडी व तुषार चौधरी और आप का एक विधायक शामिल थे। विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी के आदेश पर मार्शलों ने इन चारों विधायकों को सदन से बाहर निकाला। इसके कांग्रेस विरोध में विधायक दल के नेता अमित चावड़ा के नेतृत्व में कांग्रेस के 7 अन्य विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
निष्कासन और सदन से वॉक आउट के बाद भाजपा विधायकों ने इन विधायकों को पूरे दिन के लिए निलंबन की मांग की, लेकिन अध्यक्ष ने इस पर कोई निर्णय नहीं किया। प्रश्नकाल के बाद जिन विधायकों ने वॉकआउट किया था वे सदन में लौट आए और राज्यपाल आचार्य देवव्रत के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में शामिल हुए।
राज्य सरकार के मंत्री ने दिया जवाब
प्रश्नकाल के दौरान आप के विधायक चैतरवसावा ने राज्य सरकार से सवाल किया कि आदिवासी छात्रों के लिए 10वीं के बाद की छात्रवृत्ति बंद करने का कारण क्या है। इसके जवाब में आदिवासी विकास मंत्री कुबेर डिंडोर ने कहा कि यह छात्रवृत्ति केंद्र सरकार की ओर से प्रायोजित योजना है। इसे केवल उन अनुसूचित जनजाति (अजा) के छात्रों के लिए बंद किया गया है, जिन्होंने प्रबंधन कोटे से व्यावसायिक और तकनीकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया है। डिंडोर ने स्पष्ट किया कि सरकारी कोटे के तहत प्रवेश लेने वाले आदिवासी छात्रों के लिए यह छात्रवृत्ति बंद नहीं की गई है।
बहाल की जाए छात्रवृति: आप
आप विधायक ने मांग की कि उन हजारों आदिवासी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति बहाल की जाए, जिन्होंने यह सोचकर प्रबंधन कोटे के तहत प्रवेश लिया था कि उनकी फीस इस छात्रवृत्ति से कवर होगी। इसका तीन कांग्रेस विधायकों पटेल, खराडी और चौधरी ने समर्थन किया। साथ ही सरकार से इस छात्रवृत्ति के लिए अलग बजट आवंटित करने की मांग की।
फैसले पर करें पुनर्विचार: कांग्रेस
चावड़ा ने कहा कि यह योजना कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के कार्यकाल में सभी आदिवासी छात्रों के लिए शुरू की गई थी और उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।
जब वसावा और पटेल ने सरकार से पूछा कि क्या वह इस निर्णय को वापस लेगी, तो मंत्री डिंडोर ने किसी भी तरह की वापसी से इनकार कर दिया। इसके बाद चारों आदिवासी विधायक वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
विधानसभा अध्यक्ष की चेतावनी के बावजूद वे वेल में ही बने रहे। जबकि अन्य विपक्षी विधायक भी खड़े हो गए। जब ये चार विधायक अपनी सीटों पर नहीं लौटे, तो अध्यक्ष के आदेश पर मार्शलों ने उन्हें सदन से बाहर निकाल दिया।