दोपहर बाद भीड़ बढऩे से धूनीमाई में नारियल, हवन करने वालों की संख्या भी बढ़ गई। लगातार नारियल अर्पित करने से धूनी माई का प्रचंड रूप भी देखने को मिला। धूनी माई का तापमान 55 डिग्री से ऊपर पहुंच गया। दोपहर 2 बजे धूनी माई के बढ़ते वेग को देखते हुए दो घंटे दर्शन-हवन बंद किए गए। इसके बाद शाम 5 बजे भी नारियल अर्पित करने पर रोक लगाना पड़ी। करीब ढाई-तीन घंटे बाद धूनीमाई शांत हुई। आरती के दौरान धूनीमाई का वेग बहुत ही कम हो गया। पर्व की आरती के बाद धूनीमाई में हवन शुरू कराया गया।
गुरु पूर्णिमा पर्व पर गुरुवार को श्री दादाजी धाम में श्रद्धा का सैलाब उमड़ा। बुधवार रात से ही दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया था, जो गुरुवार रात तक जारी रहा। श्री दादाजी धाम की ओर आने वाले हर मार्ग पर तीन से चार किमी तक भीड़ ही भीड़ नजर आ रही थी। पिछले 24 घंटे में सवा 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन के लिए श्री दादाजी धाम पहुंचे। श्री दादाजी धाम में रात 7.45 बजे 108 दीपों से महाआरती हुई। महाआरती के दौरान भी करीब 10 हजार से अधिक श्रद्धालु मौजूद रहे। आरती के समय चारों गेट भक्तों के लिए खोले गए।
इस तरह से चली श्री दादाजी की सेवा
प्रात: 4 से 5.30 बजे तक समाधि स्नान, भोर आरती की गई। प्रात: 8 से 9.30 बजे तक पूजन व बड़ी आरती हुई। प्रात: 10 से 10.30 बजे तक समाधि सेवा, नैवेद्य के बाद दोपहर 3.30 से 5 बजे तक समाधि की मालिश और अभिषेक हुआ। शाम 5.30 बजे छोटी आरती की गई। वहीं शाम में श्री सत्यनारायण की कथा के बाद 7.57 से 8.22 बजे तक 108 दीपकों से बड़ी आरती की गई। रात 9.30 से 10 बजे तक समाधि सेवा की गई। इसके बाद बड़ा हवन हुआ। रात में परंपरा निभाते हुए नीमगांव महाराष्ट्र से आए भक्तों ने मशाल जुलूस निकालकर मंदिर की परिक्रमा की।