नरेन्द्र वर्मा
भीलवाड़ा। झालवाड़ दुखांतिका से प्रदेश का सरकारी व सियासी सिस्टम सवालों के घेरे में है। सामान्य प्रशासन की भीलवाड़ा में अजमेर चौराहा की सिविल लाइंस कॉलोनी भी अपनी सुरक्षा को लेकर स्थानीय जिला प्रशासन से जवाब मांग रही है।
बजट को तरसती कॉलोनी में अधिकांश परिवार परेशानी के साए में है। सर्वाधिक बुरे हाल तो यहां कृषि विभाग के चार आवासीय भवनों की है, यह भवन कब जमींदोज हो जाए कह नहीं सकते। इसके बावजूद इनमें कर्मचारी परिवार के साथ रहने को बेबस है।
नगर विकास न्यास, नगर निगम, सार्वजनिक निर्माण विभाग, कलक्ट्रेट भवन व अफसरों के सरकारी आवास पर दिल खोलकर मेहरबान है, लेकिन सिविल लाइंस में राजकीय कर्मचारियों के हिस्से की कोई सुध नहीं ले रहा है। कर्मचारियों के मरम्मत की मांग उठाने पर बजट नहीं होने का ही राग अलापते है।
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कर्मचारी कहिन.….आवासों से बस पीड़ा टपक रही है
कर्मचारी बताते है कि जिला प्रशासन ने सरकारी कर्मचारियों के बेहतर आवास की व्यवस्था के लिए अजमेर चौराहा के समीप करीब 60 साल पहले सिविल लाइंस कॉलोनी का निर्माण कराया था। अधिकांश आवासों की उम्र भी यहां 55 साल से अधिक हो चुकी है, लेकिन यहां वहीं आवास ठीकठाक है जिनके किराएदार रूतबेदार पद पर है। अन्यथा यहां के अधिकांश आवास बदहाल है। कई मकानों में दीवारें पोली होने से प्लास्टर गिर रहा, फर्श टूट रही है। छतें टपक रही है, चारदीवारी क्षतिग्रस्त है, घर का पार्क जंगल में तब्दील है। मकान की बसावट चूने, पत्थर व पट्टी से होने से यहां की साफ-सफाई में भी काफी समय लगता है। मकान के हिस्सों से चूना गिर रहा। बारिश के मौसम में तो दो फीट तक पानी घरों में घुस जाता है। यहां कॉलोनी में एक दो नहीं वरन एक दर्जन से अधिक सरकारी आवास रखरखाव के अभाव में खंडर है। कई कर्मचारी अपनी जेब से आवास की मरम्मत करवा रहे है।
खण्डरनुमा मकान गिराए जाए
सिविल लाइंस में ई,एफ व जी सेक्टर में अधिकांश आवासों के यही हाल है। यहां 12 आवास खंडर है। इनमें नौ तो उजाड़ है। इनमें जी वन आवास तो पूरा टूटा चुका है। जहरीली जीव पनप रहे है। घरों में सांप व जहरीली जीव तक घुस जाते है। लोगों ने ऐसे खण्डरनुमा मकान गिराने की मांग उठाई है।
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आवासों में भी अतिक्रमण
किसान भवन रोड पर सिविल लाइंस का पिछवाड़ा हिस्सा है। यहां सड़़क किनारे मटकी, गमले बचने वाले लोगों ने यहां आवासों के पीछे के हिस्से में अवैध कब्जा कर रखा है। लोग दीवार कूदकर भीतर घुस जाते है और सामान रखते है। मनाही के बावजूद यह लोग कब्जे नहीं हटा रहे है।
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निजी आवास मालिक भी परेशान
कॉलोनी के ड्रेनेज नकारा सिस्टम की सजा सिविल लाइंस में बने निजी आवासों के परिवारों भी भुगतना पड़ रहा है। यहां का सीवरेज सिस्टम फेल है। नालियां गंदगी व कीचड़ से ठस है। हल्की बारिश में ही सड़कों का पानी घरों में घुस जाता है। सांप-बिच्छू आदि जंगली जीव पनप रहे है।
– कृष्णा काबरा, निजी आवास, सिविल लाइंस