4 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

समाचार

कांवाखेड़ा के गुदड़ी के लाल, देश में कर रहे धमाल

भीलवाड़ा शहर की कांवाखेड़ा बस्ती को खेल प्रतिभाओं की खदान कहेंगे तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। यहां अभाव में रहने वाले बच्चे खेल मैदान पर कड़ी मेहनत कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुके है। इन्हें गुदड़ी के लाल व कांवाखेड़ा के चमकते हीरे भी कहा जाने लगा है।

Google source verification

भीलवाड़ा। भीलवाड़ा शहर की कांवाखेड़ा बस्ती को खेल प्रतिभाओं की खदान कहेंगे तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। यहां अभाव में रहने वाले बच्चे खेल मैदान पर कड़ी मेहनत कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुके है। इन्हें गुदड़ी के लाल व कांवाखेड़ा के चमकते हीरे भी कहा जाने लगा है।

ऐसे बच्चों को बॉस्केटबॉल, रोलबॉल, बैडमिंटन व स्केटिंग के मैदान में ऊंचाई तक पहुंचाने के पीछे कोच विजय बाबेल की मेहनत भी कड़ी रही है। उन्होंने नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर इन प्रतिभाओं को उभारा है। खेल मैदान से निकले कई खिलाड़ी सरकारी महकमों में अच्छे पद पर कार्यरत है।

शास्त्रीनगर स्थित कांवाखेड़ा यूं तो साधारण परिवारों की बस्ती है, लेकिन यहां की खेल प्रतिभाएं अद्भूत है। ऐसे परिवारों के बच्चों में खेले के प्रति एक ललक व जनून है। तेरह साल पूर्व यहां के बच्चों को खेलने के पूरे अवसर नहीं मिल रहे थे और ना ही उन्हें को सुविधा थी। मैदान भी इनके लिए नसीब में नहीं था। ऐसे में पूर्व बास्केटबॉल खिलाड़ी विजय कुमार बाबेल गुरु द्रोणाचार्य बने।

उभरी कई प्रतिभाए

कांवाखेड़ा में तेरह वर्ष पूर्व अस्तित्व में आया खेल मैदान अब कांवाखेड़ा के खिलाडि़यों की तकदीर बन चुका है। यहां बालिकाओं के साथ अब बड़ी संख्या में बालक भी खेलों का प्रशिक्षण लेने के लिए आने लगे है। बास्केटबॉल के साथ ही यहां ड्राप रो बॉल व बैडमिंटन का अभ्यास भी खिलाडि़यों में कराया जा रहा है। अभी दीपक मीणा, शालू शुक्ला, खुशबू गोराई, भावना बैरवा, अंकित मीणा, मनप्रीत कौर, उमा बैरवा, मनीष व धोबी व अदनान खेल की चमक देश के बॉस्केबॉल कोर्ट में दिखा रहे है।

कांवाखेड़ा ने बटोरे कई पदक

कांवाखेड़ा मैदान से प्रथम राष्ट्रीय खिलाड़ी गुरमीत कौर बनी थी । इस मैदान के 250 से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपना जौहर दिखा चुके हैं। इनमें 200 राष्ट्रीय पदक विजेता। जिसमें 25 अन्तर्राष्ट्रीयखिलाड़ी बन चुके हैं। बाॅस्केबॉल में मीनाक्षी धाकड, दिव्या नायक, दीपिका नायक, पूनम बैरवा तथा उमा बैरवा, विकास मीणा, हेमेन्त नायक, शैलेश कुमार मीणा राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा चुके है। जबकि मनप्रीत कौर व मनीष धोबी अभी अंतरराष्ट्रीय बॉस्केटबॉल खिलाड़ी है।

देश विदेश में छाए रहे होनहार

कठिन परिश्रम से तैयार किए खिलाड़ी भी भिन्न-भिन्न अकादमियों में अपने खेल की बारीकियां सीख रहे हैं। बॉस्केटबाल में आशा नायक, प्रिया शर्मा, अर्चना जगरवाल, डिम्पल धोबी, चंचल शर्मा, करिश्मा शर्मा, करिश्मा मीणा, कशिश सोनी एवं राहुल मीणा भी नेशनल खेल चुकी है। जबकि कांवाखेड़ा की ही राजलक्ष्मी नायक रोलबॉल की विश्व विजेता भारतीय टीम की सदस्य रह चुकी है। इसी मैदान के हीरे शहजाद हुसैन फौज में है। प्रिया शर्मा व हेमेन्त नायक रेलवे में है। राजलक्ष्मी नायक, आशा, लक्ष्मी व विकास मीणा राजस्थान पुलिस सेवा में है। महावीर बंजारा साई का कोच है।

बच्चों के साथ मैदान में बहाया पसीना

कांवाखेड़ा में अभाव-अभियोग की जिन्दगी जी रहे बच्चों में खेल प्रतिभाओं के बड़े अवसर नजर आए। उनकी ऊंगली थामी और छोटे से खेल मैदान पर उतारा। बॉस्केटबॉल के साथ ही अन्य खेलों की बारिकियां सिखाई। खेल उपकरण व सुविधाएं जुटाने के लिए व्यक्तिगत प्रयास किए। प्रतिभाएं निखरने लगी तो प्रबृद्धजन व संस्थाएं भी सहयोग करने आगे आने लगी। कांवाखेड़ा के साथ ही शहर की विभिन्न कॉलोनियों के बच्चे भी खेल मैदान से जुड़ने लगे। यहां साढ़े तीन सौ खिलाडि़यों को मैदान में उतार चुके है। इनमें कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी है।

विजय बाबेल, कोच एवं पूर्व बॉस्केटबॉल खिलाड़ी