शहर में दूषित पानी के कारण टाइफाइड के मामलों में अचानक वृद्धि हुई है। इससे दो बच्चों की संदिग्ध मौत हो गई है, जबकि दो अन्य बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है। वर्तमान में अब 152 मरीज इलाज के लिए भर्ती हैं, जिनमें से 50 मरीजों की रिपोर्ट टाइफाइड पॉजिटिव आई है। इस संक्रमण के फैलने से पूरे क्षेत्र में डर का माहौल है और स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता से सक्रिय है। सोमवार को बीस नए मरीज बढ़े हैं।
अस्पतालों में बिस्तरों की भारी कमी
मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सिविल अस्पताल के बाल विभाग में एक अतिरिक्त वार्ड शुरू किया है। अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से पीडियाट्रिशियन व विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम गांधीनगर सिविल अस्पताल में तैनात की गई है। अब तक दो बच्चों की संदिग्ध मौत की जानकारी सामने आई है। एक बच्चे की मौत का कारण सेप्टिसेमिकशॉक विद डीआईसी और दूसरे की वायरल एंसेफैलोपैथी बताया गया है। मृतक बच्चों में से एक की टाइफाइड से मौत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच जारी है। इस संबंध में गांधी नगर सिविल अस्पताल की अधीक्षका डॉ. मीता पारिख ने कहा कि सभी मरीजों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी है।
प्रभावित क्षेत्रों में बड़ा सर्वे
संक्रमण मुख्य रूप से सैक्टर 24, 25, 26, 27, आदिवाड़ा और जीआईडीसी क्षेत्र में फैला है। निगम की टीमें अब तक 20,800 से अधिक घरों में सर्वे कर चुकी हैं और 90,000 आबादी की स्वास्थ्य जांच की गई है। साथ ही संक्रमण रोकथाम के लिए 30,000 क्लोरीन टैबलेट और 20,600 ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं।
मनपा की सख्त कार्रवाई
टाइफाइड के बढ़ते मामलों को देखते हुए गांधीनगर महानगरपालिका ने विशेष मुहिम के तहत कार्रवाई तेज कर दी है। एस्टेट शाखा व फूड सेफ्टी विभाग की टीमों ने सोमवार सुबह से ही शहर के विभिन्न इलाकों में जांच की। खुले में खाद्य पदार्थ बेचने वाली 44 लारियों और स्टॉल को बंद कराया गया, जिनमें 18 पानीपुरी व रगड़ा की लारियां, 13 सोडा बेचने वाले, 7 फ्रूट सलाद व बादाम शेक के स्टॉल और 6 बर्फ के गोले की लारियां शामिल हैं।