
हिण्डौनसिटी. यदि बुजुर्गों से पूछा जाए तो मलेरिया बुखार का नाम सुनते ही गर्मी में भी झुरझुरी छूट आती है। कभी बुखार से तपता बदन तो कभी सर्दी की कपकपी का अहसास। बुखार के चढऩे और उतरने के चक्र वाले मच्छर जन्य संक्रामक रोग से पहले गांव के गांव तपते थे। लेकिन बचाव की एहतियातों के प्रति जागरुकता से मलेरिया पर मानो लगाम लग गई है।
जिले में इस वर्ष 1 जनवरी से 21 अप्रेल तक जांच के लिए 67 हजार 558 रक्त के नमूने लिए गए। अच्छी बात यह है इनमें से एक भी रोगी संक्रमित नहीं मिला है।
दरअसल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से बीते कई वर्ष से मौसमी बीमारियों से बचाव की जागरुकता में लोग सबसे ज्यादा मलेरिया के प्रति सजग हुए हैं। जिला चिकित्सालय के फिजीशियन डॉ आशीष शर्मा ने बताया कि मलेरिया से बचाव इलाज से कहीं आसान है।
इसके लिए घर और आसपास पानी का जमाव न होने दें, कूलर और टंकियों को नियमित रूप से खाली करें, रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें और मच्छररोधी क्रीम का उपयोग करें। यदि किसी को बुखार आता है तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच कराएं।
ब्लॉक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजकुमार गुप्ता ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से लेकर महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता की बताई एतियातों की पालना में गांवों में भी लोग जागरुक हुए हैं।
जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार चार माह में जिलेभर में 49,986 स्लाइड जांच और 17,572 रेपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) किए गए, जिनमें एक भी मरीज मलेरिया पॉजिटिव नहीं पाया गया।
स्लाइड टेस्ट अभी भी मानक : जिला चिकित्सालय के प्रयोगशाला प्रभारी कमलजीतङ्क्षसह ने बताया कि समय के साथ डाग्नोस्टिक सिस्टम अपडेट हुआ है। चिकित्सालय में अब ब्लड सीरम से रेपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) से दो मिनट में मलेरिया की जांच होती है, लेकिन स्लाइड स्टेन की माइक्रोस्कोपिक जांच की अभी मानकों पर खरी है। आरडीटी में पॉजीटिव मिलने की स्थिति में रोगी की ब्लड स्लाइड जांच की जाती है।
ब्लॉक स्लाइड जांच आरडीटी जांच
पीएमओ करौली 447 3141
पीएमओ हिण्डौन 4368 567
करौली 4925 3456
मासलपुर 2640 1646
हिण्डौन 7363 575
श्रीमहावीरजी 5138 1320
सपोटरा 5263 880
मंडरायल 4506 00
टोडाभीम 8275 5987
गुढ़ाचंद्रजी 7061 00