
महेश व्यास
बाबरा/पाली। गांव के एक सेवानिवृत शारीरिक शिक्षक आज भी खिलाडिय़ों के साथ मैदान में सुबह से डटे नजर आते हैं। वे यहां उन्हें खेल की बारीकियां सिखाते रहते हैं। कस्बे के राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय से 31 जुलाई 2018 को वरिष्ठ खेल शिक्षक शंकरसिंह जैतावत पद से सेवानिवृत हो गए। वे सरकारी पद से तो सेवानिवृत हो गए है, लेकिन आज भी उनके दिल में खिलाडिय़ों में खेल प्रतिभा निखारने का समर्पण भाव मौजूद है।
उनकी सेवानिवत्ति के बाद शारीरिक शिक्षक का पद रिक्त हो गया। लेकिन जैतावत ने गांव की खेल प्रतिभाओं को निखारने का बीड़ा उठा लिया। उन्होंने 16 अगस्त से खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए नि: स्वार्थ भाव से सेवाएं देना शुरू कर दिया। सुबह-शाम रोजाना खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देते हैं। एथलीटों के साथ फुटबॉल में जैतावत अपने कार्यकाल में बाबरा स्कूल की टीम का वर्षो तक लोहा मनवा चुके हैं। जैतावत के कार्यकाल के दौरान 19 वर्षीय वर्ग में खिलाडिय़ों की एथलीट टीम का दबदबा लगातार 13 वर्षो से जिलास्तरीय शील्ड काबिज है। वही 17 वर्षीय वर्ग के एथलीट टीम भी वर्ष 2005 से 2017 तक 11 बार (2006 व 2016 में द्वितीय) जिले में प्रथम स्थान पर आ रहे हैं।
राज्य स्तर पर 169 का हो चुका चयन
जिलास्तरीय जनरल चैम्पियनशिप एथेलीटिक्स प्रतियोगिता आयोजन के उपरांत वर्ष 2005 से राउमावि बाबरा की एथलीट टीम में भाग लेने वाले 19 वर्षीय वर्ग में 85 व 17 वर्षीय वर्ग में 56 एथलीटों तथा फुटबॉल में 28 खिलाडिय़ों का अब तक राज्यस्तर पर चयन हो चुका है। यहां के एथलीटोंं का दल कई वर्षो से राज्यस्तर पर जिले का नेतृत्व कर रहा है।
जोश व उम्मीदों को रखूंगा कायम
– ग्रामीणों व खिलाडिय़ों की इच्छा शक्ति व भावनात्मक जुड़ाव के कारण ही मेरी सेवानिवृति के बाद भी मुझे अपना फर्ज निभाने का अवसर मिला है। खेल के क्षेत्र में खिलाडिय़ों के जोश व उम्मीदों को कायम रखने का पूरा प्रयास करूंगा। -शंकरसिंह जैतावत, सेवानिवृत वरिष्ठ खेल शिक्षक, राउमावि बाबरा