27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

प्रयागराज

डीआईओएस जौनपुर को अवमानना केस में हाईकोर्ट ने भेजा जेल

कोर्ट ने उन पर पन्द्रह दिन की सजा और दो हजार रूपये जुर्माना लगाया है।

Google source verification

इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर के जिला विद्यालय निरीक्षक भाष्कर मिश्रा को कोर्ट के आदेश की अवहेलना में जेल भेज दिया। कोर्ट ने उन पर पन्द्रह दिन की सजा और दो हजार रूपये जुर्माना लगाया है। भाष्कर मिश्रा के साथ ही कोर्ट ने जौनपुर के एक विद्यालय के प्रबंध समिति के प्रबंधक अजय कुमार सिंह को भी जेल भेजते हुए उनको एक माह की कैद और दो हजार रूपये जुर्माना की सजा सुनायी है।

 

विद्यालय के प्रधानाचार्य रणजीत सिंह की अवमानना याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने दिया। हाईकोर्ट ने दस जनवरी 17 को याची प्रधानाचार्य की सेवानिवृत्ति आदेश को रद्द करते हुए उन्हें वापस सेवा में बहाल करने और पूरा वेतन देने का निर्देश दिया था। डीआईओएस और प्रबंधक ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया।

 

अवमानना याचिका दाखिल होने पर हाईकोर्ट ने आदेश के पालन का एक और मौका डीआईओएस व कालेज प्रबंधक को दिया था। उसके बाद भी आदेश का पालन न होने पर कोर्ट ने डीआईओएसऔर प्रबंधक को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। अवमानना का स्पष्ट मामला मानते हुए अदालत ने दोनों को सजा सुनाते हुए सीजेएम के मार्फत दोनों को जेल भेजने का आदेश दिया।

 

 

काशी विश्वनाथ मंदिर के हक में मकान बेचने के खिलाफ याचिका खारिज

ज्ञानवापी वाराणसी स्थित मकान संख्या 28/11 को काशी विश्वनाथ मंदिर के हक में बेचने को चुनौती दी गयी है। मकान मालिक विठ्ल दास अग्रवाल ने 16 मार्च 18 को राज्यपाल के नाम काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह के मार्फत बैनामा किया है।

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में अनुच्छेद 226 में हस्तक्षेप से इंकार कर दिया। कोर्ट ने मदनमोहन गिरी व 14 अन्य किराएदारों से कहा कि वे बेदखली के खिलाफ सिविल वाद दाखिल करें। सिविल विवाद की सिविल कोर्ट ही सुनवाई कर सकती है।

 

यह आदेश जस्टिस गोविन्द माथुर व जस्टिस जयंत बनर्जी की खण्डपीठ ने याचियों के अधिवक्ता को सुनकर दिया। काशी विश्वनाथ मंदिर एक्ट को अनुच्छेद 26 डी के खिलाफ होने के कारण असंवैधानिक घोषित करने के मुद्दे पर कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इसे वैधानिक ठहरा चुका है। इसे दुबारा सुनने का आधार नहीं है।

 

By- Court Corrospondence

बड़ी खबरें

View All

प्रयागराज

उत्तर प्रदेश