रायसेन. जिला मुख्यालय पर सीएमएचओ कार्यालय में हुए घोटाले की जांच जारी है। शुक्रवार को भोपाल से आए अधिकारी ने जिला कोषालय में दस्तावेज तलब किए। सीएमएचओ भी हाजिर हुए। अभी तक की जांच में तीन कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, जबकि बाकी दस कर्मचारियों सहित वो अधिकारी बचे हुए हैं, जिनकी जानकारी के बिना यह घोटाला संभव नहीं था। इस घोटाले के तकनीकी पक्ष की ओर नजर डालें तों स्पष्ट होता है कि बिना अधिकारियों के कोई भी बिल, बाउचर, खर्च का भुगतान नहीं किया जा सकता। फैमली पेंशन, जीपीएफ, डीपीएफ आदि के भुगतान अधिकारियों के हस्ताक्षर और अनुमोदन के बिना नहीं हो सकता।
कर्मचारियों से उनके खातों में जमा की गई राशि की वसूली की जा रही है, आनन फानन में 3 कर्मचारियों को निलंबित भी कर दिया, लेकिन बाकी कर्मचारी अभी अछूते हैं। लेखा से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि यह घोटाला ट्रेजरी के सॉफ्टवेयर आई आइएफएमआइएस से उजागर हुआ है। जिसमे हर विभाग को लॉगिन पासवर्ड दिए हैं। जिसका उपयोग अधिकृत व्यक्ति द्वारा ही बिल वाउचर लगाए और अपलोड किए जाते है। इसमें पहला लॉगिन अकाउंटेंट का होता है, जिसे मेकर कहा जाता है। जो बिल, वाउचर को आइएफएमआइएस पर अपने लॉगिन से विभिन्न मदों में रिसीव कर अपडेट करते हैं। इसके बाद दूसरा लॉगिन डीडीओ या सीएमएचओ का होता है जिस पर जो बिल लगाए हैं उनको ओटीपी के माध्यम से वेरिफाई किया जाता है और ये ओटीपी सीएमएचओ, डीडीओ के मोबाइल पर आता है। इसके बाद बिल ऑनलाइन डीटीओ जिला कोषालय के पास स्वीकृति के लिए जाता है। जिसे डीटीओ स्वीकृत कर देते है और राशि खातों में ट्रांसफर हो जाती है। इस प्रक्रिया में पूरी जवाबदेही अकाउंटेंट लॉगिन और डीडीओ लॉगिन की होती है। किस मद की राशि किस काम में खर्च करना है, यह सब सोच समझकर किया जाता है, जिसकी जिम्मेदारी विभाग के मुख्य लिपिक और मुख्य अधिकारी की होती है।
इनका कहना है
सीएमएचओ कार्यालय में बड़े घोटाले की जानकारी मिली है। जिला कोषालय अधिकारी को जांच के निर्देश दिए हैं। उन्हे जल्द और पूरी गंभीरता से जांच के लिए कहा है, तीन दोषियों को निलंबित भी किया गया है।
अरविंद दुबे, कलेक्टर रायसेन
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