
शहर में एक दर्जन से अधिक स्थानों से निकलीं भगवान शिव की बारातें, भोले की भक्ति में मगन रहे लोग
सागर. महापर्व महाशिवरात्रि पर बुधवार को भगवान शिवजी जब मंदिरों से दूल्हा बनकर निकले तो पूरे शहर के भक्त बाराती बन गए। भगवान भोलेनाथ के जयकारों के शहर गूंज उठा। शहर में करीब एक दर्जन से अधिक स्थानों से भगवान भोलेनाथ की बारात निकाली गई। बारात में कोई बाबा बना तो कोई भूत-प्रेत और सपेरा। शहर के तीन बत्ती से कटरा तक महाशिवरात्रि का अद्भूत नजारा देखने को मिला। यहां पर जब शाही बारात निकली तब चारों तरफ से भक्त दूल्हा बने भगवान शिव का देखने के लिए आतुर थे। वहीं शहर के प्राचीन देव भूतेश्वर मंदिर, नागेश्वर मंदिर, बड़ा बाजार स्थित धनेश्वर मंदिर, नीलकंठेश्वर मंदिर, देव मार्केण्डेश्वर मंदिर और बड़े शिवजी के दरबार में भक्तों का तांता लगा रहा। रात्रि में यहां भी विवाह महोत्सव मनाया गया। दूल्हा के रूप में भगवान शिव का विशेष शृंगार किया गया।
शाही बारात में शामिल हुए हजारों भक्त
जय महाकाल हिन्दू संगठन के तत्वावधान में महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती महा-विवाह महोत्सव पर चंपा बाग हनुमान मंदिर से भगवान शिव की भव्य शाही बारात निकाली गई। बारात के पूर्व बाबा का पंचामृत अभिषेक किया गया। बारात में जगह-जगह विशेष प्रस्तुति दी गईं। सागर के प्रसिद्ध शिव शक्ति डमरू दल अपने 111 सदस्यों की टीम के साथ तीन बत्ती पर भस्म उठाते हुए डमरू पर मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति दी। दल के सभी सदस्य एक ही ड्रेस कोड में नजर आए। बाबा की शाही बारात इतवारा बाजार, सराफा, कोतवाली होते हुए तीन बत्ती पहुंची। यहां से कटरा तक आतिशबाजी हुई। बारात कटरा, राधा तिगड्डा से वापस उसी मार्ग से होती हुई चंपा बाग हनुमान मंदिर में समाप्त हुई। जहां पर शिव पार्वती विवाह की रस्में देर रात तक जारी रही।
राजसी वैभव के साथ निकले धनेश्वर महादेव
बड़ा बाजार स्थित धनेश्वर शिवालय से बाबा धनेश्वर राजसी वैभव से श्रृंगारित हो पालकी में सवार होकर बैंड, डीजे, धमाल पार्टी, डमरू दल, भजन मंडली के साथ वारात लेकर निकले। बुंदेली परंपरा के अनुसार बारात के पहले भगवान धनेश्वर की राज फिरी। घरों के द्वार पर टीका किया गया। बारात धनेश्वर मंदिर से शुरू होकर सराफा, कोतवाली, तीनबत्ती, कटरा पुलिस चौकी होते हुए पुन: इसी मार्ग से लौटते हुए महाकाली मंदिर चमेली चौक पहुंची। जहां पर भव्य आतिशबाजी की गई। महाकाली मंदिर कमेटी द्वारा बारात का बुंदेलखंडी परंपरा के अनुसार पान, शरबत और भांग से स्वागत किया गया। इसके बाद शिव-पार्वती विवाह की रस्में शुरू हुई।देवघर से निकले भोलेनाथ, सिंधी कॉलोनी वासी बने बारातीसागर. सिंधी कॉलोनी देवघर गुरदासमल शिव मंदिर से शाही शिव बारात निकली। यहां दोपहर 1 बजे भोले भंडारी की बारात निकली गई। बारात में देवो के साथ भूत-पिचाश भी शामिल थे।