अखिल भारतीय वैदिक संगोष्ठी के पहले दिन यज्ञ मय हुआ विश्वविद्यालय परिसर
सागर. डॉ. हरिसिंह गौर विवि के संस्कृत विभाग एवं महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्त्वावधान में वैदिक वाङ्मय में विज्ञान विषय पर त्रिदिवसीय अखिल भारतीय वैदिक संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। मंगलवार को अभिमंच सभागार के बाहर यज्ञ के साथ संगोष्ठी की शुरुआत हुई। मुख्य वक्ता कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. राजशेखर मिश्र ने कहा कि अनुभवजन्य ज्ञान ही विज्ञान है ,जिसमें वेद संबंधित मंत्रों का संदर्भ सहित उल्लेख किए। उन्होंने वेदों में वृष्टि विज्ञान, जीव विज्ञान, खगोलीय विज्ञान, सृष्टि विज्ञान, आयुर्वेद सहित वर्तमान में प्रचलित सभी विज्ञान के मूल स्रोत वेद ही हैं। मुख्यअतिथि राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तिरुपति के कुलपति प्रो. जीएसआर कृष्णमूर्ति ने वैदिक परंपरा पर विचार- विमर्श करते हुए वैदिक परम्परा से होने वाले लाभ के बारे में बताया। वेद में प्रतिपादित सिद्धांतों से आयु वृद्धि का उपाय एवं भारतीय समाज में एकता बनाए रखने की बात की। अध्यक्षता कर रहीं विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा वेदों के बिना पूर्ण नहीं हो सकती। स्वागत भाषण संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने दिया। प्रथम सत्र में वक्ता डॉ. राघवेन्द्र शर्मा, डॉ. धनञ्जयमणि त्रिपाठी एवं डॉ. नीरज शर्मा ने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता डॉ. मिश्रीलाल वाराणसी ने की। संचालन डॉ संदीप यादव ने किया।