सवाईमाधोपुर.रणथम्भौर का एक बाघ राजस्थान व मध्यप्रदेश दोनों प्रदेश के वन अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। दरअसल रणथम्भौर का बाघ टी-136 गत वर्ष अगस्त माह में टेरेटरी की तलाश में रणथम्भौर से बाहर निकला था। बाद में बाघ करौली के कैनलादेवी अभयारण्य पहुुंच गया। कई माह तक करौली के जंगलों में रहने के बाद यह बाघ से करौली से धौलपुर से एमपी के जंगलों में पहुंच गया था। अब एक बार फिर बाघ धौलपुर के जंगलों से निकलकर एमपी के मुरैना के जंगलों में पहुंच गया है। ऐसे में अब एक बार फिर राजस्थान केसाथ- साथ एमपी के वन विभाग की चिंताएं भी बढ़ गई है। वन अधिकारियों ने बताया कि अगस्त माह में रणथम्भौर से करौली पहुूचने के बाद सितम्बर माह में यह बाघ धौलपुर पहुंच गया था इसके बाद 20 अक्टूबर को यह बाघ एमपी के मुरैना पहुंच गया था लेकिन बाद में 4 नवम्बर को यह बाघ फिर से धौलपुर लौट गया था। इसके बाद 16 नवम्बर को एक बार फिर से बाघ टी-136 का मूवमेंट मुरैना में मिला था।
धौलपुर से केवल 27 किमी दूर है एमपी
वन अधिकारियों ने बताया कि धौलपुर की वन विहार रेंज से एमपी के मुरैना के जंगलों की दूरी महज 27 कि मी है। वहीं धौलपुर से कूनो अभयारण्य की दूरी 103 किमी है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले दो दिनों से बाघ का मूवमेंट लगातार कूनो अभयारण्य की ओर होने की जानकारी मिल रही है। वन विभाग की ओर से बाघ की लगातार मॉनिटरिंग व टे्रकिंग कराई जा रही है।
पहले भी रणथम्भौर से कूनो पहुंच चुके हैं बाघ
रणथम्भौर के बाघों का मध्यप्रदेश के जंगलों से भी काफी पुराना नाता रहा है। पहले भी कई बार रणथम्भौर के बाघों ने एमपी के जंगलों की ओर रुख किया है। कई बाघ पहले भी एमपी पहुंच चुके है और कुछ दिनों तक वहां के जंगलों में रुकने के बाद वापस रणथम्भौर लौट आते हैं। रणथम्भौर का बाघ टी-38 तो एमपी के कूनो अभयारण्य में आठ साल तक रहा था।इसके बाद वापस रणथम्भौर लौटा था।
चीतों के लिए हो सकता है खतरा
वन्यजीव विशेषज्ञों की माने तो बाघ चीतों की तुलना में काफी अधिक शक्तिशाली होता है। ऐसे में चीता बाघ का सामना नहीं कर सकता है। ऐसे में बाघ व चीते दोनों का एक साथ रहना भी नामुमकिन सा ही है। ऐसे में यदि रणथम्भौर का बाघ टेरेटरी की तलाश में कूनो अभयारण्य तक पहुंचता है तो चीतों के लिए भी खतरा हो सकता है।
इनका कहना है…
वर्तमान में बाघ का मूवमेंट एमपी के जंगलों में है। इस संबंध में एमपी वन विभाग को भी अवगत कराया गया है। बाघ की मॉनिटरिंग कराई जा रही है।
– किशोर गुप्ता, उपवन संरक्षक, धौलपुर।