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सवाई माधोपुर

सरिस्का की रानी बनी बाघिन टी-134

रणथम्भौर की खण्डार रेंज में किया टे्रकुंलाइजसड़क मार्ग से बाघिन को लेकर रवाना हुई टीम

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सवाईमाधोपुर.

रणथम्भौर से एक बार फिर बाघिन को शिफ्ट किया गया है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस बार वन विभाग की ओर से रणथम्भौर के नॉन पर्यटन क्षेत्र में आने वाली रेंंज खण्डार में से बाघिन को शिफ्ट किया गया है। वन अधिकारियों ने बताया कि बाघिन को टे्रकुंलाइज करने के लिए वन विभाग की टीम सुबह करीब छह बजे ही जंगल में पहुुंच गई। इसके बाद वन विभाग की टीम ने बाघिन को टे्रस करने के लिए टे्रकिंग शुरू की और बाघिन को करीब 12 बजे के करीब टे्रकुंलाइज कर लिया गया। इसके बाद चिकित्सकों की टीम ने बाघिन का स्वास्थ्य परीक्षण किया। और इसके बाद बाघिन को सड़क मार्ग से अलवर के सरिस्का के लिए रवाना किया गया। इस दौरान रणथम्भौर बाघ परियोजना के सीसीएफ सेडूराम यादव, सरिरस्का के सीसीएफ आरएन मीणा, उपवन संरक्षक मोहित गुप्ता, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के उपवन संरक्षक संजीव शर्मा, पशु चिकित्सक डॉ. राजीव गर्ग, डॉ. सीपी मीणा आदि मौजूद थे।

जेड खोह में किया टे्रकुंलाइजवन अधिकारियों ने बताया कि लगातार छह घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद दापेहर करीब 12 बजे के आसपास बाघिन को रणथम्भौर की खण्डार रेंज के जेड खोह में टे्रकुंलाइज किया। इसके बाद बाघिन को सड़क मार्ग से अलवर के सरिस्का के लिए रवाना किया गया।

यह है टी-134 का इतिहासवन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाघिन टी-134 रणथम्भौर की बाघिन टी-93 के पहले लिटर की संतान है। इसकी उम्र करीब तीन साल है और यह बाघिन अब एक बार भी मां नहीं बनी है। पहली बार में बाघिन टी-93 ने तीन शावकों को जन्म दिया था।इनमें दो मेल व एक फीमेल शावक शामिल थे। इनकों वन विभाग की ओर से टी-132, टी-133 व टी-134 नाम दिए गए थे।

इनका कहना है…रणथम्भौर की खण्डार रेंज से गुरुवार को बाघिन टी-134 को टे्रकुंलाइज करके सरिस्का भेजा गया है। बाघिन पूरी तरह स्वस्थ्य है।

-सेडूराम यादव, सीसीएफ, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।