सीधी। शहर सहित संपूर्ण जिले में सोमवार को ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का पर्व मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा परंपरागत तरीके से मनाया गया। त्याग और समर्पण के प्रतीक स्वरूप कुर्बानियां दी गई। शहर के ईदगाह में सुबह ईद-उल-अजहा की नमाज पढक़र मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अमन शांति एवं खुशहाली की दुआएं मांगी।
नमाज के बाद अमन शांति के लिए अल्लाह ताला से दुआएं मांगी और एक दूसरे को गले लगाकर बधाई दिया। पर्व को लेकर सुबह से ही लोगों में उत्साह देखा गया। नए कपड़े पहनकर लोग विभिन्न ईदगाह और मस्जिदों में जमा होने लगे थे। इस्लामी कैलेंडर के अंतिम माह जिलहिज्जा की दसवीं तारीख को यह पर्व मनाया जाता है। कुर्बानी आत्मा को शुद्ध करने का एक उत्तम साधन है। कुर्बानी में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि दिखावे के लिए न हो। बताया गया कि हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे हजरत इस्माइल अलेही सलाम को कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए थे। अल्लाह को यह अदा काफी पसंद आई। इसके बाद सभी लोगों ने त्याग एवं समर्पण के प्रतीक स्वरूप के अनुसार बकरे की कुर्बानी दी गई। उसके बाद देर शाम तक कुर्बानियों का सिलसिला चलता रहा। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कहा कि ईद उल अजहा एकता का संदेश देता है, एकता से बड़ी कोई दौलत नहीं है। बकरीद के अवसर पर ईदगाह में नमाज अदा करने के दौरान पुलिस द्वारा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किये गए थे। यहां शहर के कई गणमान्य नागरिकों ने पहुंचकर मुस्लिम भाइयों को गले मिलकर ईद उल अजहा की मुबारक बाद दी।
मड़वास जामा मस्जिद में ईद उल अजहा की नमाज अदा की गई-
जामा मस्जिद मड़वास में सोमवार को सुबह ईद उल अजहा की नमाज अदा की गई। मुस्लिम भाइयों ने नमाज अदा करने के बाद आपस में गिले शिकवे मिटाकर एक दूसरे को गले लगा कर ईद की मुबारकबाद दी। ईद उल अजहा की नमाज अदा करने कई गांव से मुस्लिम समाज के लोग मड़वास जामा मस्जिद में एकत्रित हुए। जिसमें कुसमी, खोखरा, खजुरिहा, मझिगवां, धनौर, अकला, नूरी मोहल्ला गढ़ाई टोला सहित अन्य गांव के लोग शामिल रहे। ईद उल अजहा की नमाज इमाम शेख अफजलने पढ़ाई। नमाज सुबह 8 बजे अदा की गई। इस दौरान जामा मस्जिद मड़वास में प्रशासनिक व्यवस्था में उप तहसील मड़वास नायब तहसीलदार धन कुमार टोप्पो, चौकी प्रभारी मड़वास केदार परौहा, बृजलाल, बब्बू केवट, एएसआई संतोष साकेत, प्रधान आरक्षक गोविंद सिंह, आरक्षक राकेश सिंह, विवेक सिंह इत्यादि प्रशासनिक अमला शांतिपूर्ण व्यवस्था बनाने के लिए मौजूद रहा।