गनियारी प्लाजा को जर्जर बताते हुए बोले कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त, नहीं ले सकते रिस्क
सिंगरौली. जिला मुख्यालय वैढऩ में अंबेडकर चौक के पास गनियारी में व्यावसायिक प्लाजा का निर्माण हुए अभी 15 वर्ष भी व्यतीत नहीं हुए और उसे डिस्मेंटल करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। निर्माण के दौरान गुणवत्ता की अनदेखी का नतीजा यह है कि प्लाजा जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। बिल्डिंग का कोई भी हिस्सा कभी भी गिर सकता है। यही वजह है कि व्यापारियों को सोमवार शाम 5 बजे तक बिल्डिंग खाली करने निर्देश जारी किया गया है। इन सबके बीच प्लाजा बनाने वाली ठेका कंपनी की न ही जांच हुई और न कोई कार्रवाई की गई।
नगर निगम की ओर से बिल्डिंग को खाली करने संबंधित आदेश का विरोध शुरू हो गया है। व्यापारियों की दलील है कि पांच वर्ष पहले बिल्डिंग की जर्जर स्थिति को लेकर लीज होल्डर और किराएदारों के साथ निगम अधिकारियों की बैठक हुई थी। बैठक में प्लाजा के मरम्मत का निर्णय लिया गया था, लेकिन उसके बाद नगर निगम की ओर से प्लाजा की बिल्डिंग को सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस कार्य नहीं किया गया। नतीजा बिल्डिंग की स्थिति और खराब हो गई। पांच वर्ष बाद निगम अधिकारियों की नींद टूटी और अचानक भी दुकानों को खाली करने का निर्देश जारी कर दिया। जबकि व्यापारी दुकान खाली करने को तैयार नहीं हैं।
व्यापारी बोले, चौपट हो जाएगा व्यावसाय
गनियारी प्लाजा को खाली करने संबंधी जारी आदेश के विरोध में संयुक्त व्यापार मंडल वैढऩ के सचिव अजय जायसवाल के नेतृत्व में व्यापारी सोमवार को नगर निगम आयुक्त, एसपी व कलेक्टर से मिले। व्यापारियों ने कहा कि बिना कोई विकल्प दिए उनसे दुकान खाली करना गलत है। कहा कि नगर निगम को नया दुकान तैयार करने में अभी वर्षों लगेंगे। तब तक उनका व्यवसाय चौपट हो जाएगा। व्यापारियों ने अधिकारियों से दुकान खाली करने के लिए वक्त देने की मांग की, लेकिन अधिकारी इसके लिए तैयार नहीं हुए।
कलेक्टर बोले, कीमती है आप सबकी जान
व्यापारियों ने नगर निगम आयुक्त के आदेश के विरोध में कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला से मुलाकात की और दुकान खाली करने के लिए वक्त मांगा, लेकिन कलेक्टर ने निगम आयुक्त के आदेश पर व्यापारियों को अमल करने की सलाह दी। कलेक्टर बोले आप सबकी जान व्यावसाय से अधिक कीमती है। रिस्क लेना ठीक नहीं है। अभी और बारिश हो सकती है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
एसपी ने भी किया निरीक्षण
व्यापारियों की मांग पर पुलिस अधीक्षक निवेदिता गुप्ता ने भी प्लाजा का निरीक्षण किया। वहां की स्थिति देखने के बाद एसपी ने व्यापारियों से कहा कि वे पहले नगर निगम आयुक्त और कलेक्टर के साथ इस संबंध में चर्चा करेंगी। प्लाजा की स्थिति को देखने के बाद एसपी ने भी माना कि प्लाजा की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है।
प्लाजा में हैं 166 दुकान, 50 संचालित
वर्ष 2010 में गनियारी प्लाजा का उद्घाटन हुआ था। बेसमेंट व प्रथम तल की बिल्डिंग में 166 दुकान बनाई गई हैं। वर्तमान में करीब 50 दुकानों में व्यावसाय संचालित हो रहा है। पूर्व में व्यापारियों ने कई बार प्लाजा की मरम्मत की गुजारिश की, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी है। बता दें कि जर्जर हो चुके प्लाजा को सिविल इंजीनियर्स की एक कमेटी ने भी पूरी तरह से जर्जर बताया है। निगम परिषद ने भी बिल्डिंग के डिस्मेंटल की अनुमति दे दी है।
व्यापारी बोले, अस्थाई दुकान दें फिर खाली करेंगे
– सभी लीज होल्डर व किरायादारों को अस्थाई लीज पर वैढऩ बाजार में बाजार के अनुरूप अस्थाई दुकान बनाकर दी जाए। जिसकी जो साइज है, उसे उस साइज की दुकान दी जाए।
– निर्धारित अवधि अधिकतम दो वर्ष में प्लाजा बिल्डिंग का निर्माण कार्य पूरा किया जाए। बिल्डिंग नहीं बनने की स्थिति में उचित मुआवजा दिया जाए।
– निर्माण पीपीपी मॉडल पर कराया जाए, ताकि समय पर गुणवत्तापूर्ण तरीके से कार्य पूरा किया जा सके।
– वर्तमान स्थल के अनुसार दुकानों का आवंटन हो और कॉम्प्लेक्स की डिजाइन गुणवत्ता व आवंटन के निर्धारण में व्यापारियों को शामिल किया जाए।
– प्लाजा तोडऩे से बनने तक और आगे करीब तीन माह तक भू-भाटक और किराया नहीं लिया जाए। साथ ही शिफ्टिंग के लिए उचित खर्च निगम की ओर से दिया जाए।
वर्जन –
आयुक्त बोले, पार्किंग स्थल में बनेंगी अस्थाई दुकान
नगर निगम आयुक्त डीके शर्मा का कहना है कि प्लाजा में दुकानों को संचालित करने की अनुमति देना बड़ी घटना को आमंत्रित देने जैसा है। इसलिए प्लाजा को डिस्मेंटल करने का निर्णय बरकरार रहेगी। लीज वाले दुकानदारों को काली मंदिर मार्ग में मंदिर के सामने पार्किंग स्थल में अस्थाई दुकान बनाई जाएंगी। प्लाजा बनने के बाद फिर से व्यापारियों को वहां दुकान आवंटित कर दी जाएंगी।