मंडला. दो दिवसीय महिष्मति व्यास दंड मां नर्मदा उत्तरवाहिनी परिक्रमा यात्रा का अगाज शनिवार को किया गया। परिक्रमा में शामिल नर्मदा भक्तों ने घाघा में रात्रि विश्राम किया। जहां महाआरती के बाद देर रात तक भजन कीर्तन का दौर चलता रहा। रविवार की सुबह यात्रा घाघी पहुंची। जहां से नाव के माध्यम से लगभग एक सैकड़ा श्रद्धालुओं ने नर्मदा नदी पार की। दूसरे तट में बबैहा में अल्प विराम के बाद यात्रा आगे की और बढ़ी। ग्वारी, जंतीपुर होते हुए यात्री कटरा पहुंचे। जहां पर दोपहर के भोजन की व्यवस्था की गई थी। यहां से मौसम में बदलाव भी देखने को मिला रिमझिम बारिश के बीच मां नर्मदा के जयकारे लगाते हुए श्रद्धालु राजेश्वरी वार्ड जहां से यात्रा प्रारंभ की थी वहां के लिए निकल पड़े। बारिश में भी नर्मदा भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। राजेश्वरी वार्ड के व्यास नारायण मंदिर में पूजन के बाद यात्रा का समापन किया गया। अन्य कार्यक्रम भी होना था लेकिन खराब मौसम के चलते नहीं हुए। ग्वारी में विधायक डॉ अशोक मर्सकोले व स्थानीय लोंगों के सहयोग से स्वल्पाहार एवं चाय नाश्ता की व्यवस्था की गई। सेवा का अवसर लोगों को मिला। जिसमें गणेश पाठक, मनीष कुमार राय, नवीन सेन, नारायण प्रसाद साहू, घनश्याम राय, सतीश राय, राजेंद्र चौधरी आदि उपस्थित रहे।
42 किमी की रही दूसरे साल की यात्रा
गौरतलब है कि यात्रा का यह दूसरा वर्ष है। महाराजपुर संगम से घाघा-घाघी तक लगभग 21 किमी एक तट व 21 किमी बैबहा से राजराजेश्वरी वार्ड तक 21 किमी कुल 42 किमी की परिक्रमा पूर्ण की गई। बता दें कि नर्मदा परिक्रमा को लेकर शास्त्रों में एक प्रावधान यह भी किया गया है कि जो कोई भी मां नर्मदा की परिक्रमा किसी कारणवश चाहते हुए भी न कर पा रहा हो तो वह व्यक्ति उत्तरवाहिनी मां नर्मदा परिक्रमा कर इस पुण्य लाभ को प्राप्त कर सकता है। यह जिलेवासियों का सौभाग्य है कि मां नर्मदा जिले को तीन ओर से घेरते हुए मंडला से कल-कल करती आगे बढ़ रही है।
इसी के साथ जिले में उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमा तट भी स्थित है। जिससे नर्मदा नगरी का महत्व और बढ़ जाता है। अमरकंटक से मां नर्मदा का उद्गम होता है और खंबात की खाड़ी तक मां नर्मदा प्रवाहित होती है, इस पूरे मार्ग में तीन स्थान ऐसे हैं जहां मां रेवा उत्तर दिशा में प्रवाहित हुई हैं। जहां-जहां मां नर्मदा उत्तर दिशा में प्रवाहित हुई उतने क्षेत्र की परिक्रमा करने का प्रावधान शास्त्रों में बताया गया है और यह परिक्रमा वर्ष में सिर्फ एक माह में ही की जाती है वह है चैत्र का माह। पूरे नर्मदा क्षेत्र में 3 स्थान ऐसे हैं जहां माँ नर्मदा उत्तरवाहिनी हुई हैं, इनमें से एक गुजरात प्रदेश में तिलकवाड़ा, दूसरा क्षेत्र मंडला और तीसरा ओमकारेश्वर के पास का स्थान है जो कि अब बांध बन जाने से डूब क्षेत्र में आकर विलोपित हो गया है। गुजरात के तिलकवाड़ा में उत्तरवाहिनी परिक्रमा वर्षो से की जा रही है। यह आयोजन उस क्षेत्र का बहुत बड़ा आयोजन होता है। दो दिवसीय यात्रा में शामिल नर्मदा भक्तों का जगह-जगह स्वागत भी किया गया।