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Video यह हैं भारत के फेंसिंग स्टार सुनील जाखड़, रोचक है इस खेल में आने की कहानी

वर्ष 2011 में वहां आर्मी के लिए तलवारबाजी की टीम का चयन किया जाना था। संयोग से मैं वहीं पर खड़ा था। मेरी लम्बाई देखकर कोच ने सवाल पूछा तलवारबाजी खेल लोगे? मैंने बिना देर किए हां कर दी। इस प्रकार मैं तलवारबाजी के खेल में आया।

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राजेश शर्मा

झुंझुनूं. मैं सेना में सिपाही पद पर भर्ती हुआ। ड्यूटी नौ राजरिफ सेंटर दिल्ली में थी। वर्ष 2011 में वहां आर्मी के लिए तलवारबाजी fencing की टीम का चयन किया जाना था। संयोग से मैं वहीं पर खड़ा था। मेरी लम्बाई देखकर कोच ने सवाल पूछा तलवारबाजी खेल लोगे? मैंने बिना देर किए हां कर दी। इस प्रकार मैं तलवारबाजी के खेल में आया। सेना से ही ट्रेनिंग ली, अब देश के लिए पदक जीत रहा हूं। यह कहना है तलवारबाजी के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी सुनील जाखड़ का। राजस्थान के झुंझुनूं जिले के खेतड़ी के पास सुनारी गांव निवासी सुनील से खेलों पर बातचीत की, पेश है मुख्य अंश।


सवाल: प्रारंभिक पढाई कहां हुई?
जवाब: पहली से कक्षा छह तक सुनारी गांव के संस्कृत स्कूल से पढाई की। सातवीं से बारहवीं तक सेफरागुवार गांव में पढा। इसके बाद बीए नीमकाथाना से किया।

सवाल: बचपन से ही तलवारबाजी खेलते थे?
जवाब: खेलों की तलवार अलग होती है, मैंने सेना में जाने के बाद पहली बार तलवार देखी थी। मेरा चयन भी संयोग से हुआ। मैं तो बचपन से वॉलीबाल खेलता था। मेरी लम्बाई 181 सेंटीमीटर है। लम्बाई के कारण पहला चयन हुआ।

सवाल: अब तक का सफर कैसा रहा?
जवाब: बिना मेहनत के कुछ भी संभव नहीं है। संयोग से मौका एक बार मिल सकता है, लेकिन जीत के लिए तो ईमानदारी से हर दिन मेहनत करनी पड़ती है। पंद्रह बार नेशनल और अठारह बार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेल चुका। वर्ष 2019 में साउथ एशियन गेम्स में एक साथ दो स्वर्ण पदक जीते। इसके बाद लंदन में अगस्त 2022 में हुई कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। कुल सौलह स्वर्ण, पांच रजत और तीन कांस्य पदक जीत चुका।

सवाल: आगे की क्या तैयारी है?
जवाब: अभी चीन में होने वाले एशियन गेम्स की तैयारी कर रहा हूं। इसके बाद सपना पेरिस में होने वाले ओलम्पिक में देश के लिए पदक जीतना है। देशवासियों की दुआ रही अच्छी सूचना आएगी।


जवाब: ट्रेनिंग कहां ली?
जवाब: शुरू से आर्मी स्पोट्र्स सेंटर पूणे से ट्रेनिंग ले रहा हूं। अभी भी वहीं तैयारी कर रहा हूं।

सवाल: सबसे ज्यादा योगदान किसका रहा?
जवाब: सफलता के पीछे सैकड़ों लोगों का योगदान रहता है, लेकिन मां शांति देवी, पिता बीरबल ङ्क्षसह व पत्नी ज्योति का खास योगदान रहा। कोच धर्मेन्द्र सिंह व यूक्रेन के कोच डेनियल ने मुझे खेलों की बारीकियां सिखाई।


सवाल: देश और राज्य में खेलों के बारे में क्या कहेंगे?
जवाब: अच्छे कोच लगाए जा रहे हैं। मैदानों का स्तर अंतरराष्ट्रीय स्तर का बन रहा है। अब तो झुंझुनूं में भी युवा तलवार चलाना सीख रहे हैं। देश में खेलों का माहौल बेहतर बन रहा है।