बस्सी @ पत्रिका. प्रदेश के साथ ही जयपुर जिले में सरसों एवं चने की फसल तैयार कर बिकने के लिए मण्डियों में आ गई, जिसकी खरीद समर्थन मूल्य पर एक अप्रेल से शुरू की जाएगी और अभी गेहूं की कटाई ही शुरू नहीं उसकी खरीदारी की तिथी 10 मार्च से शुरू कर दी है। जबकि होना यह चाहिए था, कि सरसों व चने की समर्थन मूल्य पर खरीद पहले शुरू करनी चाहिए थी, और गेहूं की खरीद बाद में शुरू करनी चाहिए थी। सरकार की इस सोची समझी चाल से किसानों को नुकसान के अलावा फायदे की कोई गुंजाइश नहीं है। या यूं कहा जा सकता है कि किसान राजनीति का शिकार हो रहा है।
चने – सरसों की खरीद शुरू होगी, तब तक किसान मण्डियों में ही बेच देंगे जिंस…
इस बार प्रदेश में चने व सरसों की बम्पर पैदावार है। सरसों की कटाई का काम 90 फीसदी पूरा हो चुका है। हर मण्डी में सरसों की आवक भी शुरू हो गई है। चने की भी कटाई शुरू हो गई है। अगले सप्ताह तक चना भी मण्डियों में बिकने के लिए आ जाएगा। इस समय किसान को रबी की फसल का कर्ज चुकाने, ब्याह शादियों में पैसों की जरूरत होती है। वहीं गर्मी की शुरूआत किसानों को कूलर, पंखे, फ्रीज, कपड़े आदि खरीदने होते हैं, ऐसे में किसानों को मजबूरी में चने व सरसों की फसलों की जिंसों को मण्डियों या फिर स्थानीय व्यापारियों को औने- पौने दामों में ही बेचना पड़ेगा।
गेहूं की कटाई मार्च के अंत में होगी शुरू…
किसानों के खेतों में अभी तक गेहूं की फसल की सिंचाई का ही काम चल रहा है। 90 फीसदी खेतों में गेहूं की फसल को पकने में अभी कम से कम एक पखवाड़े का समय लगेगा। यानि मण्डियों में ही अपेल महीने में गेहूं की जिंस आएगी। जबकि सरकार ने गेहूं की जिंस की खरीद 10 मार्च से शुरू कर दी है। सवाल यह है कि जब जिंस ही नहीं है तो किसान गेहूं की जिंस बेचने के लिए कहां से लाएगा।
फिर भी नहीं कोई व्यवस्था…
सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद के लिए 10 मार्च की तिथि निर्धारित कर दी, लेकिन अभी तक खरीद केन्द्रों पर ना तो बारदाना आया और ना ही टैण्डर हुए। यदि कोई किसान जिंस लेकर आए भी उसको खरीदने की कोई तैयारी नहीं की है।
चना सरसों खरीद की तो गाइड लाइन ही नहीं आई…
सरकार ने चना व सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद की तिथि 10 मार्च से शुरू करने की घोषणा तो कर दी, लेकिन खरीद केन्द्रों पर अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की है। ना तो खरीद केन्द्रों पर बारदाना आया है और ना ही कांटे बाट लगे हैं। (कासं )