राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस विशेष
बिक्री में 50 से 60 फीसदी तक गिरावट
आर्डर में आई कमी, बेरोजगार हुए मजदूर
संकट में ध्वज निर्माण इकाई
सरकारी कार्यालयों तक ही सिमट कर रह गया खादी का तिरंगा
हुब्बल्ली. राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा हमारा गौरव और हमारी शान है। स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा शान से फहराया जाता है। पहले तो केवल खादी से बने तिरंगे ही होते थे, और इनके निर्माण की एकमात्र यूनिट हुब्बल्ली में हुआ करती थी। केंद्र सरकार ने दिसंबर 2021 में ध्वज संहिता में संशोधन किया, जिसमें मशीन से बने पॉलिएस्टर तिरंगे को भी अनुमति दी गई। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज संहिता में संशोधन से हुब्बल्ली स्थित देश की एकमात्र खादी ध्वज निर्माण इकाई में बिक्री में और गिरावट आई है। पहले, ध्वज संहिता में केवल खादी ध्वज के उपयोग की अनुमति थी। हुब्बल्ली में देश की एकमात्र बीआईएस-मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय ध्वज निर्माण इकाई है जो कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ बेंगेरी के तहत काम करती है।
बिक्री में गिरावट
हर साल जुलाई के अंत तक महासंघ (संयुक्त संघ) विभिन्न सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और निजी संघों और संगठनों को 2.5 करोड़ रुपए तक के तिरंगे भेजता था, परन्तु अब इकाई को संघर्ष करना पड़ रहा है। खादी के ध्वजों की मांग कम होने से खादी बुनकरों और श्रमिक बेरोजगार हो रहे हैं। हमेशा व्यस्त रहने वाली इकाई के श्रमिकों के चेहरे पर उदासी और चिंता छाई है।
बुनकर और श्रमिक कष्ट में
कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ के सचिव शिवानंद मठपति ने पत्रिका से विशेष बातचीत में कहा कि ध्वज संहिता में संशोधन से 50 से 60 फीसदी बिक्री कम हुई है। 2022 में हर घर तिरंगा अभियान ने राहत दी थी और तब 4 करोड़ रुपए के विभिन्न आकारों के राष्ट्रीय ध्वजों की अपूर्ति की गई थी। अकेले जुलाई में 1.70 करोड़ रुपए के झंड़ों की आपूर्ति की गई थी। 2023 में जुलाई में 1.50 करोड़ रुपए के झंडे बिके। वर्ष 2024 में तीन करोड़ रुपए के झंड़ों की बिक्री का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन अबतक मात्र 89 लाख 28 हजार 263 रुपए के झंड़ों के आर्डर आए हैं। इनमें से अकेले दिल्ली भवन की ओर से ही 30 लाख रुपए का आर्डर है, जो किसी भी सामान्य वर्ष की तुलना में बहुत कम है। यह निराशाजनक है। इससे खादी बुनकरों और श्रमिकों को काफी कष्ट सहना पड़ रहा है।
कामगारों में अधिकतर महिलाएं
झंडे के निर्माण में लगभग 1,200 लोग हैं, जिनमें मुख्य रूप से महिलाएं हैं। धारवाड़ और बागलकोट जिलों में फैले संघ की 15 से अधिक इकाइयों में राष्ट्रीय ध्वज निर्माण संबंधी कार्य होते हैं। हुब्बल्ली के बेंगेरी स्थित ध्वज निर्माण इकाई में सिलाई, छपाई, रंगाई का काम होता है, जबकि खादी के कपड़े की कताई और बुनाई खादी इकाइयों में होते हैं, जिसमें बागलकोट जिले के गद्दिनकेरी, तुलसीगेरी, जालिहाल (प्रमुख इकाई) शामिल हैं।
लाल किले में फहराता है यहीं का ध्वज
बीआईएस की ओर से 2004 में मान्यता प्राप्त यह संघ ध्वज संहिता का कड़ाई से पालन करता है और इसके परिणामस्वरूप, इस इकाई का ध्वज ही लाल किला तथा अन्य सरकारी कार्यालयों और प्रमुख स्थलों पर फहराया जाता है। हुब्बल्ली के बेंगेरी स्थित ध्वज निर्माण इकाई की इंचार्ज अन्नपूर्णा दोड्डमनी ने कहा कि खादी झंडों की तुलना में पॉलिएस्टर कपड़े के झंडे सस्ते होते हैं, इसलिए स्वाभाविक रूप से खादी संघ से खरीदने वालों की संख्या में भी कमी आई है।
पुरानी व्यवस्था वापस हो
अन्नपूर्णा ने कहा कि पुरानी व्यवस्था को वापस लाने से खादी और ग्रामोद्योग को नई गति मिलेगी, जिस पर महात्मा गांधी जोर देते थे। खादी क्षेत्र की रक्षा करने के बजाय पॉलिएस्टर कपड़े से बने झंडे बनाने वाले निजी मिल मालिकों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।