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श्री गंगानगर

गुरबाणी में ईश्वरीय ताकत समाहित

Gurbani contains divine power- ‘सभे सांझीवाल सदाइनि’ कीर्तन दरबार में उमडी संगत

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श्रीगंगानगर. श्रीअकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह का कहना है कि गुरबाणी धर्म को जोड़ने का काम करती हैं। ताकत देती है और ईश्वर से सीधा संवाद करती है। गुरबाणी में वे यहां सुखाडिय़ा सर्किल स्थित रामलीला मैदान में श्रीअकाल तख्त साहिब, शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर, सिंधी समाज, सहजधारी समाज व सिख समाज के सहयोग से आयोजित ‘सभे सांझीवाल सदाइनि’ कीर्तन दरबार में बोल रहे थे। श्रीअकाल तख्त के जत्थेदार ने कहा कि गुरुनानक साहिब जी कहीं नहीं गए, वे हमारे अंदर हैं और गुरु ग्रंथ की गुरबाणी में समाहित हैं। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज को गुरबाणी से अलग नहीं हैं। सिंधी समाज को सिख समुदाय का अटूट अंग बताते हुए कहा कि जिस प्रकार शरीर से कभी नख अलग नहीं हो सकता, सूरज अपनी दिशा नहीं बदल सकती और समुंदर सूख नहीं सकता। उसी प्रकार सिंधी समाज हमारे साथ जुड़े हुए हैं। सिंधी के साथ साथ कई समाज जैसे बंजारे आदि गुरबाणी का हिस्सा हैं।

सिंधियों को दोनों तरफ से तोड़ने या अलग करने का प्रयास हुआ था। जत्थेदार ने कहा कि जिस प्रकार पहाड़ से अलग अलग धाराएं जमीन पर गिरकर नदी का रूप लेती है, उसी प्रकार गुरु नानक महाराज की ये धाराएं कभी भी अपने आप से अलग नहीं होती। इस समागम में शिरोमणि कमेटी के प्रधान हरजिन्द्र सिंह धामी सहित विभिन्न सिख जत्थेबंदी और काफी गुरुद्वारों के पदाधिकारी साक्षी बने।
गुरुद्वारा धन-धन बाबा दीप सिंह शहीद के मुख्य सेवादार तेजेन्द्रपाल सिंह टिम्मा ने बताया कि इस समागम में राजस्थान ही नहीं, बल्कि पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली से भी श्रद्धालुओं की करीब एक सौ बसें और 750 कारें व अन्य वाहनों से संगत पहुंची। समागम की व्यवस्था कराने के लिए कांग्रेस नेता अशोक चांडक सहित कईयों को सम्मानित भी किया गया।
इस बीच, रागी जत्थेदार गुरप्रीत सिंह रिंकू वीर (मुंबई वाले) ने कथा-कीर्तन शुरू किया तो पंडाल छोटा पड़ गया। उन्होंने मोरे ह्रदय बसो गोपाल…भजन से ऐसा समां बांधा कि संगत वहां कम होने की बजाय बढ़ती चलती गई। आयोजकों ने संगत को बैठने के लिए हाथों हाथ पंडाल का एक हिस्सा खोलकर वहां दरियां बिछाई। वहीं रागी जत्थेदार ने रस-रस गुण गायो ठाकुर और अल्लाह तेरी रूह में …भजन गाया तो संगत मंत्रमुग्ध हो गई। समागम स्थल पर 80 फीट चौड़ा और 15 फीट ऊंचा स्टेज पर गुरु ग्रंथ साहिब का दरबार सजाया गया था, यह आकर्षक का केन्द्र रहा।

माथा टेकने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गई। समागम के दौरान ग्राउंड के दोनों तरफ आने वाली संगत के लिए जोड़ाघर की व्यवस्था, पानी की स्टॉल, चाय की स्टाल और लंगर सेवा भी थी। करीब पांच सौ से अधिक सेवादारों ने व्यवस्था संभाली। वहीं गोपीराम बगीची में वाहनों की पार्किंग कराई गई। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के आला अफसरों ने डेरा डाले रखा।