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शहरी पीएचसी की गुणवत्ता की निगरानी और मूल्यांकन

- राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम-- पुरानी आबादी वार्ड चार व पांच स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का राष्ट्र स्तरीय टीम ने लिया जायजा

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शहरी पीएचसी की गुणवत्ता की निगरानी और मूल्यांकन
– राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम-
– पुरानी आबादी वार्ड चार व पांच स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का राष्ट्र स्तरीय टीम ने लिया जायजा
श्रीगंगानगर. राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम एनक्यूएएस की राष्ट्र स्तरीय टीम ने दो दिन तक शहर की पुरानी आबादी के वार्ड नंबर चार व पांच स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्धारित मापदंड के अनुसार निरीक्षण किया। टीम में पूना से डॉ. सुशील देव व अहमदाबाद से डॉ. अमित कुमार शामिल थे। टीम ने सोमवार और मंगलवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का एनक्यूएएस के निर्धारित मापदंड में तय बिंदुओं के हिसाब से जांच की।
टीम ने इस दौरान दवा वितरण केंद्र, जांच लैब, टीकाकरण कक्ष, परिवार कल्याण कक्ष व स्टोर सहित केंद्र की हर गतिविधि को बारीकी से परखा। साथ ही केंद्र के रिकॉर्ड की जांच भी की गई। डॉक्टर्स व नर्सिंग स्टाफ भी प्रोपर ड्रेस कोड में नजर आए।

उल्लेखनीय है कि एनक्यूएएस का प्रमाण राजकीय जिला चिकित्सालय व कुछ सीएचसी को मिल चुका है। इसके अलावा जिले की कुछ सीएचसी का राज्य स्तर पर एक्यूएएस के लिए निरीक्षण हो चुका है।

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बैठक में की स्टाफ से चर्चा
मंगलवार को निरीक्षण के बाद कार्यक्रम के जिला नोडल प्रभारी व अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी परिवार कल्याण डॉ. मुकेश मेहता, केंद्र प्रभारी डॉ. कपिल सेतिया सहित अन्य नर्सिंग ऑफिसर टीम से मिले। बैठक में राष्ट्रीय टीम के सदस्यों ने स्थानीय टीम को एनक्यूएएस के निर्धारित मापदंड की जानकारी दी।


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प्रमाण पत्र मिला तो मिलेंग तीन लाख रुपए
निर्धारित मापदंड पूरा करने पर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वार्ड नंबर चार व पांच श्रीगंगानगर को तीन लाख रुपए का नकद पुरस्कार मिलेगा। इसमें 75 प्रतिशत राशि केंद्र के विकास और 25 प्रतिशत राशि डॉक्टर्स व नर्सिंग स्टाफ को प्रोत्साहन स्वरूप दी जाएगी।

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जांच के दौरान इन पर किया फोकस
गुणवत्ता की निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक मानकीकृत प्रक्रिया भी तय की गई है। इसमें शहरी पीएचसी में राष्टीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों को मोटे तौर पर आठ बिंदुओं पर फोकस किया गया। इसमें सेवा प्रावधान, रोगी अधिकार, इनपुट, सहायता सेवाएं, नैदानिक देखभाल, संक्रमण नियंत्रण, गुणवत्ता प्रबंधन और परिणाम आदि पर फोकस किया गया।

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