
awareश्रीगंगानगर. बच्चे में बचपन के प्रारंभिक वर्षों से ही सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श में भेद करने की समझ पैदा करने के मकसद से शुरू किया गया स्पर्श अभियान तीन साल में दस लाख से ज्यादा बच्चों को जागरुक कर चुका है। अभियान के तहत दौसा, प्रतापगढ़ एवं जयपुर जिले में बड़े स्तर पर निजी एवं सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाए गए।
दौसा जिले में तो एक ही दिन में जिला प्रशासन की ओर से 3.5 लाख बच्चों को एक साथ इस विषय पर जागरूक करके कीर्तिमान भी स्थापित किया गया है। स्पर्श अभियान के कोऑर्डिनेटर विक्रम सिंह राघव ने बताया कि अगस्त 2019 से अक्टूबर 2022 तक 10 लाख से अधिक बच्चों को जागरूक किया गया है। इस दौरान लगभग पांच हजार से अधिक स्कूलों में सात हजार से अधिक सेशन हो चुके।
कोरोना काल में पडोसी प्रदेशों में भी ऑनलाइन सेशन किए गए। अभियान की मुख्य कार्यकर्ता एवं कोऑर्डिनेटर प्रियंका कपूर ने बताया गया कि अभियान के तहत नर्सरी में पढ़ने वाले तीन साल के छोटे बच्चे से लेकर 12वीं में पढ़ने वाले किशोर को भी जागरूक किया गया। 9वीं से 12वीं कक्षा के बच्चों के लिए असुरक्षित स्पर्श से बचने के साथ उनको ऐसा ना करने की जानकारी तथा इंटरनेट पर बरतने वाली सावधानियों के बारे में भी अवगत कराया जाता है।
चार तरह के प्रशिक्षण माॅड्यूल
अभियान में प्राथमिक एवं माध्यमिक कक्षाओं के छात्रों के लिए जूनियर, सेकंडरी एवं सीनियर सेकंडरी के विद्यार्थियों के लिए सीनियर, विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए स्पर्श फॉर टीचर्स तथा भविष्य में शिक्षक बनने वाले अर्थात बीएड, एमएड तथा एसटीसी आदि के विद्यार्थियों के लिए स्पर्श फॉर बडिंग टीचर्स नामक अलग-अलग प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए गए हैं ।
अभियान के तहत निजी एवं सरकारी विद्यालयों में संपर्क स्थापित कर लगभग 45 मिनट से एक घंटे के सेशन के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित व असुरक्षित स्पर्श में अंतर समझने के तरीके, उनके उदाहरण, शरीर के निजी अंगों; जिन्हे कोई अजनबी अनावश्यक रूप से स्पर्श नहीं कर सकता, की जानकारी, किसी विकट परिस्थिति में जोर से चिल्लाने , चिल्लाकर वहां से भाग जाने तथा किसी विश्वसनीय को अपने साथ हुई घटना को बताने की जानकारी दी जाती है।
इसके अतिरिक्त चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में भी अवगत कराया जाता है। स्कूलों में संपर्क स्थापित करने से लेकर सेशन देने तक का कार्य अभियान के अंतर्गत प्रशिक्षित वालंटियर्स करते हैं।
इनका कहना है
स्पर्श अभियान को एक सतत कार्यक्रम के रूप में शिक्षकों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे भविष्य में भी इस संजीदा विषय पर बच्चों को जागरूक किया जाता रहेगा, जिससे हम एक ऐसे भारतवर्ष की कल्पना कर सकते है जिसमें नन्हे मुन्ने एवं किशोर अपने बचपन को सुरक्षित रख पाएंगे। साथ ही शिक्षक भी मात्र शिक्षण पर ही केंद्रित रहने की बजाय एक संपूर्ण शिक्षक के रूप में सामने आएंगे। अभियान पूर्णतया स्वैच्छिक रूप से वालंटियर्स द्वारा चलाया जा रहा है। यह न तो संस्था है ना ही इसमें किसी प्रकार का वित्तीय सहयोग लिया या दिया जाता है। इसमें कार्यरत वॉलंटियर मैनेजमेंट, प्रोफेशनल, डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, विद्यार्थी आदि क्षेत्र से है। यह पूर्णतया: पेपरलेस, ऑफिसलेस और फेसलेस मिशन के रूप में संचालित किया जा रहा है।
– नवीन जैन, वरिष्ठ आईएएस एवं स्पर्श अभियान के प्रणेता