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श्री गंगानगर
कांग्रेसियों और भाजपाइयों में जिला प्रमुख की बनने की होड़
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कांग्रेसियों और भाजपाइयों में जिला प्रमुख की बनने की होड़

- आ​खिर चुनाव आयोग ने घो​षित किया चुनाव कार्यक्रम, अगले माह होगी वोटिंग
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श्रीगंगानगर। राज्य निर्वाचन आयोग ने रिक्त पड़े जिला प्रमुख, जिला परिषद सदस्य, प्रधान, पंचायत समिति सदस्य, सरपंचों व उप सरपंचों के चुनाव कराने का निर्णय किया है। इसमें श्रीगंगानगर जिला प्रमुख का चुनाव भी शामिल है। ऐसे में अब कांग्रेसियों और भाजपाइयो में जिला प्रमुख बनने की होड़ मच गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नलिनी कठोठिया ने चुनाव कार्यक्रम घोषित किया है। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के लिए नामांकन तीन फरवरी को सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक, नाम वापसी पांच फरवरी को दोपहर तीन बजे तक, मतदान 14 फरवरी को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक होगा। मतगणना 15 फरवरी को जिला परिषद सदस्य के लिए जिला मुख्यालय पर और पंचायत समिति सदस्य के लिए पंचायत समिति मुख्यालय पर हो सकेगी। वहीं 16 फरवरी को जिला प्रमुख और पंचायत समिति के प्रधान का चुनाव कराया जाएगा। उप प्रधान का चुनाव 17 फरवरी को कराया जा सकेगा। इधर, सरपंच व पंच के लिए नामांकन 5 फरवरी को सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक, नाम वापसी छह फरवरी को, मतदान चौदह फरवरी को सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक, इसके उपरांत मतगणना की प्रक्रिया कर परिणाम घोषित किया जाएगा। अगले रोज 15 फरवरी को उप प्रधान का चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

इसलिए हो रहा यहां चुनाव
जिला प्रमुख कुलदीप इंदौरा के सांसद चुने जाने के उपरांत यह पद रिक्त हो गया था। हालांकि राज्य सरकार ने जिला परिषद सदस्य कविता रैगर को जिला प्रमुख मनोनीत किया। लेकिन हर मीटिंग में कांग्रेसियों ने हंगामा करते हुए आरोप लगाया कि जिला परिषद में कांग्रेस की संख्या बल अधिक होने के बावजूद सरकार ने लोकतांत्रिक तरीके को अपनाने की बजाय मनमर्जी से यह मनोनयन किया। इंदौरा जिला परिषद के जोन संख्या पन्द्रह से सदस्य निर्वाचित हुए थे, ऐसे में यह सीट भी खाली हो गई। इसके अलावा जोन संख्या 16 में सदस्य की मृत्यु होने पर वहां पद रिक्त है।

जिला परिषद में कांग्रेसियों का दबदबा लेकिन क्रॉस वोटिंग के आसार

जिला परिषद में कुल 31 सदस्य है। इसमें भाजपा के सिर्फ तीन, माकपा के दो और कांग्रेस से 26 सदस्य थे। इंदौरा के सांसद बनने और एक सदस्य की मृत्यु के कारण कांग्रेस के दो सदस्य कम हो गए हैं लेकिन जिला परिषद बोर्ड में कांग्रेस की संख्या बल सबसे ज्यादा है। हालांकि शंकर पन्नू जैसे डायरेक्टर कांग्रेस का दामन छोड़ चुके है, ऐसे में चुनावी समीकरण बदल भी सकते है। वहीं यदि कांग्रेस एकजुट रही तो कांग्रेस खेमे का जिला प्रमुख बन सकता है। लेकिन क्रॉस वोटिंग होने के आसार इस बार ज्यादा है।