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श्रीगंगानगर. शहर के नाले गंदगी से भरे हुए हैं। मामूली बरसात से उफन कर जनता को परेशानी में डाल देंगे। नगर परिषद प्रशासन ने क्षेत्र के मुख्य नालों की सफाई शुरू की है, लेकिन नगर विकास न्यास प्रशासन ने अभी तक प्रयास नहीं किए है। गौतमबुद्ध नगर के पास नाला जाम पड़ा है। सफाई कार्य से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मुख्य नालों की सफाई नहीं होने के कारण पानी निकासी में अड़चन आने लगी है। शहर में पानी निकासी दो क्षेत्रों में बंटी हुई है। नगर परिषद अपने स्तर पर पानी निकासी करवाती है तो दूसरे क्षेत्र में न्यास संसाधनों के अभाव में फर्मो को ठेका देकर यह काम कराती है। इधर, नगर परिषद प्रशासन ने उधमसिंह चौक से भाटिया पंप तक पूर्व मंत्री राधेश्याम कोठी रोड, उधमसिंह चौक, मीरा चौक से चहल चौक तक, वहां से ओडी मोटर्स तक नाले से एक्सकेवेटर मशीन की मदद से कचरा निकलवाया है। एक्सकेवेटर मशीन उन नालों से गंदगी निकलवाई जा रही है जहां पानी निकासी में रुकावट आ रही है। स्वास्थ्य अधिकारी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि बरसात की संभावनाओं को देखते हुए मेन नालों से कचरा निकालने की मुहिम चल रही है। इसके अलावा पुरानी आबादी और गुरुनानक बस्ती के गडढे से पाइप लाइन के माध्यम से साधुवाली लिंक चैनल में डाला जा रहा है।
इसलिए बढ़ी यहां पानी की मात्रा
नगर विकास न्यास के एक्सईएन सुरेन्द्र पूनियां ने बताया कि शिव चौक से सरकारी मेडिकल कॉलेज तक मुय नाले को पक्का कराने का टेंडर हो चुका है। पहले यह काम शुरू करने की प्रक्रिया अपनाई तो कुछ लोगों ने आकर अड़चन डाल दी। गौतम बुद्धनगर क्षेत्र में पानी की मात्रा बढ़ने की वजह जवाहरनगर क्षेत्र के अलावा कई प्राइवेट कॉलोनियों का गंदा पानी भी आने लगा है। बरसात की संभावनाओं को देखते हुए एसटीपी का नियमित संचालन कराने के लिए निगरानी रखी जा रही है।
बजट घोषणा बनकर रह गया ड्रैनेज सिस्टम
शहर में ड्रैनेज सिस्टम नहीं है। वर्ष 2023 में राज्य के बजट में ड्रैनेज के डीपीआर बनाने के लिए कवायद शुरू करने की घोषणा हुई है, लेकिन यह धरातल पर कब आएगा? इसका अता पता नहीं है। करीब दस साल पहले एक दानदाता ने वर्षा जल निकासी योजना के तहत दस करोड़ रुपए की राशि दी थी, लेकिन नगर परिषद प्रशासन ने इस राशि का इस्तेमाल नहीं किया तो यह राशि वापस करीब ढाई करोड़ रुपए के ब्याज सहित वापस लौटानी पड़ी।
यहां है बड़ी अड़चन
शिव चौक से सरकारी मेडिकल कॉलेज तक मुय नाला अधिकांश जगहों पर पक्का नहीं है, कच्चे नाले होने के कारण पानी निकासी की रतार कम है। वहीं शिव चौक से लेकर राजकीय जिला चिकित्सालय तक यह नाला कचरे से अटा हुआ है। इस नाले में जवाहरनगर समेत काफी कॉलोनियों का पानी सूरतगढ़ रोड पर गौतमबुद़्धनगर के पास वैकल्पिक व्यवस्था के लिए स्टोर किया जा रहा है। यह पानी की मात्रा लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा रामदेव कॉलोनी की मेन रोड, मोटर मार्किट और जस्सासिंह मार्ग सहित कई नालों की डिसिल्टिंग अटकी हुई है।
शहर के विस्तार के साथ सीवरेज निकासी छोटी पड़ती जा रही हैं। बरसात के दौरान जल निकासी योजना नहीं होने के कारण बरसाती कहर ढहाने लगा है। 15 जुलाई 2022 में आई भारी बरसात जलमग्न शहर को डूबने से बचाने के लिए जिला प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा ओर सेना की मदद लेनी पड़ी, लेकिन इससे अब तक सबक नहीं लिया गया है।